समय के अनुरूप हो संवाद, लेकिन मूल्य और ध्येय रहें स्थिर: जे. नंदकुमार
उदयपुर। बदलते समय और नई पीढ़ी के साथ संवाद करते हुए अभिव्यक्ति समयानुकूल होनी चाहिए, लेकिन मूल मूल्य और ध्येय स्थिर रहने चाहिए। आज जेन जी और जेन अल्फा डिजिटल त…
“संवेदना” के परिणाम
उदयपुर। बदलते समय और नई पीढ़ी के साथ संवाद करते हुए अभिव्यक्ति समयानुकूल होनी चाहिए, लेकिन मूल मूल्य और ध्येय स्थिर रहने चाहिए। आज जेन जी और जेन अल्फा डिजिटल त…
माता पिता की अति महत्वाकांक्षाओं और जिद्दी प्रवृति फूल से कोमल बच्चों के लिए कितनी घातक हो जाती है कि वे तनाव और अवसाद नहीं झेल पाते और न केवल नशीली या नींद की…
कोटा। गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा में तुलसीदास जी का 529 वॉ दिवस तुलसीदास जयंती संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।…
भारत की सांस्कृतिक चेतना में यदि किसी संत-कवि ने धर्म को लोकजीवन से जोड़ा, भाषा को जन-जन का स्वर बनाया और भक्ति को मानवता का उत्सव बना दिया, तो वे गोस्वामी तुल…
साहित्य जगत में कोटा के साहित्यकार श्री विजय जोशी कहानी और आलोचना विधा के क्षेत्र में देश में अपनी विशिष्ठ पहचान रखते हैं। पारिवारिक और सामाजिक जीवन के अनेक पह…
भारतीय संस्कृति में सावन का महीना केवल वर्षा ऋतु के आगमन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, आध्यात्मिकता, लोकपरंपरा, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक सद्भाव के स…
मेवाड़... जहां इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि परंपराओं और रिश्तों में आज भी जिंदा है। जहां राजपरिवार और अपने आत्मीय एवं सहयोगी परिवारों के बीच सुख-दुःख म…
उदयपुर | मेवाड़ की परंपरा में राजपरिवार और प्रमुख सहयोगी परिवारों के बीच आत्मीय संबंधों तथा सुख-दुःख में सहभागी होने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी परंपर…
समीक्षक: डॉ.प्रभात कुमार सिंघललेखक एवं पत्रकार कोटा"तो ऐसी है उन सबकी साठ-पार की ज़िन्दगियाँ खुशियों से भरीं जिसमें उन्हें अपनी इच्छानुसार कुछ भी करने की पूरी …
उदयपुर, 16 अगस्त। सूरजपोल दादावाड़ी में चातुर्मास के तहत साध्वी डॉ. विद्युत प्रभा श्रीजी ने कहा कि भौतिक सुख नहीं, बल्कि ज्ञान, संवेदना और आत्मकल्याण ही जीवन का…
*14 अगस्त हमारे लिए केवल भारत के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या नहीं है। यह भारतीय इतिहास का वह दिन है, जो कि इतिहास में सबसे पीड़ादायक और काले अध्याय के रूप …
" मनोवैज्ञानिक रूप से पाठक पर प्रभाव छोड़ने में सफल कृति ""क्यारी-क्यारी में खिले, इतने फूल-गुलाब। रफ़्ता-रफ़्ता हो गई, खुश्बूदार किताब ।।"वय के उस मधुमास को, …