उदयपुर। तस्वीरें हमेशा वही नहीं कहतीं, जो आंखें देखती हैं।
कभी रंग बोलते हैं, कभी रोशनी संवाद करती है और कभी साधारण से दृश्य में कल्पना एक नई दुनिया रच देती है।
कैमरे की इसी अद्भुत सृजनात्मक क्षमता से रूबरू कराती वरिष्ठ कलाकार एवं फोटोग्राफर मोहन पटेल की सातवीं चित्रात्मक फोटोग्राफी प्रदर्शनी का गुरुवार को गणगौर घाट स्थित ऐतिहासिक बागोर की हवेली में शुभारंभ हुआ।गुजरात ललित कला अकादमी के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी, कलाकार एवं फोटोग्राफर दिनेश कोठारी तथा वरिष्ठ फोटो पत्रकार राकेश शर्मा 'राजदीप' ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।इस अवसर पर योगाचार्य सुरेश पालीवाल, डॉ सुनील निमावत, महेंद्र सिंह गहलोत और सौरभ शर्मा सहित कई कला साधक उपस्थित रहे।तीन दिवसीय इस कला आयोजन में रंग, प्रकाश, छाया और कल्पनाशील संरचनाओं के माध्यम से फोटोग्राफी का ऐसा संसार प्रस्तुत किया गया है, जहां कैमरा महज दृश्य दर्ज करने वाला उपकरण नहीं, बल्कि कलाकार की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने वाली तूलिका बन जाता है।तस्वीरें नहीं, रंगों और संवेदनाओं का दृश्य संवादप्रदर्शनी की विशेषता चित्रात्मक फोटोग्राफी की वह शैली है, जिसमें यथार्थ के साथ कलाकार की कल्पनाशीलता भी आकार लेती है।
प्रकाश और छाया का संतुलन, रंगों का संयोजन तथा दृश्यों की कलात्मक संरचना छायाचित्रों को चित्रकला जैसा प्रभाव प्रदान करती है।
यहां फोटोग्राफी और पेंटिंग के बीच की सीमाएं मानो धुंधली होती नजर आती हैं।पांच दशक की कला साधना का रचनात्मक सफरमोहन पटेल का कला संसार पांच दशक से अधिक की अनवरत साधना का परिणाम है।
वर्ष 1968 में माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने अहमदाबाद के सी.एन. कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स से कमर्शियल आर्ट में डिप्लोमा प्राप्त किया।
ड्रॉइंग, पेंटिंग और डिजाइन की विधिवत शिक्षा ने उनकी कलात्मक दृष्टि को विस्तार दिया।अहमदाबाद के शिल्पी डिजाइन स्टूडियो से पेशेवर यात्रा शुरू करने वाले पटेल ने कैडिला फार्मास्यूटिकल्स, शिल्पी एडवरटाइजिंग, मुद्रा कम्युनिकेशंस और वाइब्रेंट एडवरटाइजिंग जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कलाकार, विजुअलाइजर एवं आर्ट डायरेक्टर के रूप में लगभग तीन दशक सेवाएं दीं।उनकी कलात्मक प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान मिली।
ललित कला अकादमी, विभिन्न राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनियों तथा तत्कालीन यूगोस्लाविया के जाग्रेब सैलून तक उनके छायाचित्र अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।10 अक्टूबर तक खुला रहेगा कल्पनाओं का रंग संसारआगामी 10 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 से रात 8 बजे तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया जा सकेगा।
कला प्रेमियों के लिए यह आयोजन तस्वीरों को देखने के साथ उनके भीतर छिपी कल्पना, संवेदना और सौंदर्य को महसूस करने का अवसर भी है।
