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आसमान बरसा, लेकिन नेत्रदान की सेवा नहीं रुकी—बूंदी और बारां में संपन्न हुए नेत्रदान

मौसम बिगड़ा, लेकिन सेवा का संकल्प नहीं—देर रात बूंदी और अल-सुबह बारां में नेत्रदान संपन्न

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आसमान बरसा, लेकिन नेत्रदान की सेवा नहीं रुकी—बूंदी और बारां में संपन्न हुए नेत्रदान

बूंदी/बारां। तेज बारिश और प्रतिकूल मौसम के बीच भी,शाइन इंडिया फाउंडेशन की नेत्रदान की सेवा नहीं रुकी।

बूंदी और बारां में दो दिवंगतों के नेत्रदान परिजनों की सहमति से सफलतापूर्वक संपन्न हुए।

कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ने दोनों स्थानों पर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई।बूंदी के विकास नगर निवासी एवं राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम से सेवानिवृत्त अभियंता रामचंद्र विष्णु नाटेकर ने चार वर्ष पूर्व अपनी पत्नी स्नेहलता नाटेकर के साथ 56वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर नेत्रदान का संकल्प लिया था।

इस अवसर पर परिवार के 11 से अधिक सदस्यों ने भी नेत्रदान के संकल्प पत्र भरे थे।

गुरुवार देर रात को,स्नेहलता नाटेकर के निधन के बाद उनके पुत्र आलोक नाटेकर ने परिवार की सहमति से शाइन इंडिया फाउंडेशन व इबीएसआर बीबीजे चैप्टर के कॉर्डिनेटर डॉ. कुलवंत गौड़ से संपर्क किया।

तेज बारिश के बावजूद डॉ. गौड़ ‘ज्योति रथ’ से कोटा से बूंदी पहुंचे और ज्योति मित्र इदरीस बोहरा के सहयोग से नेत्रदान संपन्न कराया।इसी तरह शुक्रवार सुबह,5 बजे,बारां में भारत विकास परिषद के सदस्य रवि अग्रवाल के भाई देवकीनंदन अग्रवाल के आकस्मिक निधन के उपरांत रवि ने स्वप्रेरणा से, अपने भाई देवकीनंदन के नेत्रदान करवाने के लिए भतीजे अंकित से सहमति लेकर ज्योति मित्र हितेश खंडेलवाल के सहयोग से शाइन इंडिया फाउंडेशन को सूचना दी गई।

डॉ गौड़ देर रात को बूंदी से नेत्रदान लेकर पहुंचे ही थे,और सुबह फिर,भारी बारिश के बीच डॉ. गौड़ कोटा से बारां पहुंचे और नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई।ज्ञात हो कि, पिछले एक माह में बारां में पांच नेत्रदान संपन्न हो चुके हैं।

दोनों परिवारों ने शोक की घड़ी में नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज को प्रेरक संदेश दिया कि मृत्यु के बाद भी आंखें किसी की दुनिया रोशन कर सकती हैं।डॉ गौड़ ने कहा कि,परिजनों के दु:ख की घड़ी में नेत्रदान करवाने का निर्णय लेना,अन्य किसी भी तरह की प्रतिकूल परिस्थितियों के आगे बहुत बड़ा कार्य है।

किसी की अंधेरी दुनिया को रौशन करने से बड़ा पुण्य कार्य कोई नहीं है।