श्रीगंगानगर। टिड्डी-सह-एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र श्रीगंगानगर की ओर से 15 एवं 16 सितंबर 2026 को गांव मन्नीवाली, ब्लॉक सादुलशहर, जिला श्रीगंगानगर में किसानों के लिए दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में किसानों को फसल सुरक्षा, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों की वैज्ञानिक जानकारी दी गई।कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. आर. के. शर्मा, उप निदेशक (खरपतवार विज्ञान) ने किया।
उन्होंने समेकित नाशीजीव प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों से फसल सुरक्षा के लिए रासायनिक उपायों के साथ जैविक, यांत्रिक एवं अन्य वैज्ञानिक विधियों को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने नियमित फसल निगरानी को प्रभावी नाशीजीव प्रबंधन की आधारभूत आवश्यकता बताया।श्री प्रकाश चंद्र, सहायक निदेशक ने कपास की फसल में गुलाबी सुंडी की समस्या, उसकी पहचान एवं प्रभावी प्रबंधन उपायों की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को समय रहते फसल की निगरानी कर अनुशंसित तकनीकों के माध्यम से गुलाबी सुंडी के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए जागरूक किया।
श्री जितेंद्र मीणा, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी (कीट विज्ञान) ने विभिन्न फसलों में पाए जाने वाले प्रमुख हानिकारक कीटों की पहचान, निगरानी एवं प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।सुश्री करीना बैफलावत, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी ने खरीफ फसलों में होने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके प्रारंभिक लक्षणों तथा रोकथाम एवं प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों के बारे में किसानों को जानकारी प्रदान की।
श्री आर. के. चौधरी, वैज्ञानिक सहायक ने राष्ट्रीय कीट सर्वेक्षण प्रणाली की उपयोगिता समझाई।
उन्होंने किसानों को मिट्टी के पीएच की जांच के सरल तरीकों तथा फसल उत्पादन में उचित पीएच प्रबंधन के महत्व से भी अवगत कराया।सुश्री वर्षा, वैज्ञानिक सहायक ने ट्राइकोडर्मा के उपयोग एवं महत्व पर जानकारी देते हुए इसके माध्यम से मृदा जनित रोगों के प्रबंधन के बारे में बताया।
उन्होंने फसलों में लाभकारी कीटों की भूमिका और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में सुश्री रिया चावला, राज्य सरकार की ओर से सहायक कृषि अधिकारी श्री इंद्राज जी, कृषि पर्यवेक्षक श्री कुलदीप जी एवं श्री प्रवीण कुमार जी, तथा अंबुजा फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान किसानों को व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ फसल सुरक्षा में जैविक उपायों के महत्व पर जोर दिया गया।
समापन अवसर पर उपस्थित किसानों को एक-एक पैकेट ट्राइकोडर्मा वितरित किया गया, ताकि वे इसका उपयोग अपने खेतों में मृदा जनित रोगों के प्रबंधन के लिए कर सकें।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को समेकित नाशीजीव प्रबंधन, गुलाबी सुंडी, खरीफ फसलों के रोग, कीट निगरानी, राष्ट्रीय कीट सर्वेक्षण प्रणाली, मिट्टी के पीएच प्रबंधन, ट्राइकोडर्मा तथा लाभकारी कीटों के संरक्षण से संबंधित उपयोगी जानकारी मिली।
किसानों ने प्रशिक्षण को फसल सुरक्षा एवं बेहतर कृषि प्रबंधन की दृष्टि से उपयोगी बताया।
