कोटा | अंगदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने का माध्यम ही नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का सर्वोच्च उदाहरण भी है।
इसी संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से शाइन इंडिया फाउंडेशन ने अपने राष्ट्रीय अंगदान जागरूकता अभियान का विस्तार राजस्थान से गुजरात तक किया है।
इस अभियान के अंतर्गत गुजरात के वडोदरा और वापी में दो दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं शिक्षाविदों को अंगदान और नेत्रदान के महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई।
इन कार्यक्रमों में शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक एवं प्रमुख वक्ता डॉ. कुलवंत गौड़ (कोटा) ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अंगदान को जीवन बचाने वाला महादान बताया।
उन्होंने समझाया कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति अपने अंगों के माध्यम से कई जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है।
विद्यार्थियों को अंगदान की प्रक्रिया, इसकी उपयोगिता, चिकित्सकीय पहलुओं तथा समाज में प्रचलित भ्रांतियों के बारे में तथ्यात्मक जानकारी दी गई और उनके सवालों के जवाब देकर शंकाओं का समाधान किया गया।
देश में हजारों नहीं, लाखों लोगों को है अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता डॉ. गौड़ ने बताया कि भारत में अंगदान की आवश्यकता और उपलब्ध अंगों के बीच बहुत बड़ा अंतर है।
राजस्थान सरकार के स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO) के अनुसार, देश में प्रतिवर्ष अनुमानित रूप से लगभग 2.50 लाख लोगों को किडनी, 80 हजार लोगों को लिवर और 50 हजार लोगों को हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है।
वहीं, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 3 मार्च 2026 तक देश में प्रमुख अंगों के प्रत्यारोपण के लिए पंजीकृत प्रतीक्षा सूची में 89,839 मरीज शामिल थे।
दो दिवसीय अभियान के अंतर्गत वडोदरा स्थित धर्मसिंह देसाई यूनिवर्सिटी की टेक्नोलॉजी एवं फार्मेसी फैकल्टी में विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के आयोजन में विश्वविद्यालय की प्रोफेसर श्वेता गौड़ का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
सत्रों के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि अंगदान और नेत्रदान केवल चिकित्सकीय विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों से जुड़ा अभियान है। युवा पीढ़ी इस संदेश को अपने परिवारों, मित्रों और समाज तक पहुँचाकर व्यापक परिवर्तन की वाहक बन सकती है।
इसी क्रम में वापी के केबीएस कॉलेज तथा रज्जू श्रॉफ रॉफेल यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट स्टडीज इंस्टीट्यूट में भी विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए।
इन कार्यक्रमों को सफल बनाने में शाइन इंडिया फाउंडेशन की गुजरात स्टेट कोऑर्डिनेटर अनीता नरूका तथा ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर जिगिशा यादव का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। स्थानीय स्तर पर समन्वय, शिक्षण संस्थानों से संपर्क तथा कार्यक्रमों के आयोजन में उनके प्रयासों ने अभियान को गुजरात में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यशालाओं के उत्कृष्ट आयोजन एवं अंगदान जागरूकता के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. कुलवंत गौड़ को धर्मसिंह देसाई यूनिवर्सिटी की ओर से डीन डॉ. तेजल सोनी एवं डीन डॉ. विपुल शाह, केबीएस कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. पूनम चौहान तथा रज्जू श्रॉफ रॉफेल यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट की ओर से डॉ. गौड़ को सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यशाला के आयोजन में रोटरी क्लब रिवर फ्रंट, वापी का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। क्लब अध्यक्ष अर्पण ताचक एवं क्लब सर्विस डायरेक्टर मनीष भावसार ने शाइन इंडिया फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शाइन इंडिया फाउंडेशन की सचिव डॉ. संगीता गौड़ ने बताया कि संस्था लंबे समय से अंगदान एवं नेत्रदान जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। अब इस अभियान को राजस्थान से आगे बढ़ाते हुए गुजरात सहित अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों तक पहुँचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
