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शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 उदयपुर · 29°C
Udaipur News

संभाग स्तरीय न्यायिक जांचों में विधि विज्ञान प्रयोगशाला का उपयोग विषयक कार्यशाला आयोजित

मुख्य बिंदु
  • संभाग के पशुचिकित्सकों ने किया विधि विज्ञान के पहलुओं पर मंथन किसानों की आय दोगुनी करने में पशु चिकित्सकों की हैं महत्वपूर्ण भूमिका उदयपुर।
  • राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर द्वारा उदयपुर संभाग में कार्यरत पशु चिकित्सकों की विधिक एवं तकनिकी दक्षता सुदृढ करने के उद्देश्य से फोरेंसिक एस्पेक्टस ऑफ वेटेरो-लीगल केसेज विषयक पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
  • ओमप्रकाश साहू ने बताया कि कार्यशाला भारत सरकार की एलएचडीसीपी एण्ड एएससीएडी योजना के अन्तर्गत आयोजित की गई।
  • कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि संभागीय अतिरिक्त निदेशक डॉ.
  • परमजीत सिंह, विधि विज्ञान प्रयोगशाला, उदयपुर व अध्यक्षता डॉ.
  • सुरेन्द्र छंगाणी, संयुक्त निदेशक राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर, विशिष्ट अतिथि डॉ लक्ष्मीनारायण मीणा, अतिरिक्त निदेशक, क्षेत्र पशुपालन विभाग, डॉ.
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संभाग के पशुचिकित्सकों ने किया विधि विज्ञान के पहलुओं पर मंथन किसानों की आय दोगुनी करने में पशु चिकित्सकों की हैं महत्वपूर्ण भूमिका उदयपुर। राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर द्वारा उदयपुर संभाग में कार्यरत पशु चिकित्सकों की विधिक एवं तकनिकी दक्षता सुदृढ करने के उद्देश्य से फोरेंसिक एस्पेक्टस ऑफ वेटेरो-लीगल केसेज विषयक पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

संस्थान के डॉ. ओमप्रकाश साहू ने बताया कि कार्यशाला भारत सरकार की एलएचडीसीपी एण्ड एएससीएडी योजना के अन्तर्गत आयोजित की गई।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि संभागीय अतिरिक्त निदेशक डॉ. परमजीत सिंह, विधि विज्ञान प्रयोगशाला, उदयपुर व अध्यक्षता डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी, संयुक्त निदेशक राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर, विशिष्ट अतिथि डॉ लक्ष्मीनारायण मीणा, अतिरिक्त निदेशक, क्षेत्र पशुपालन विभाग, डॉ. परमजीत सिंह अतिरिक्त निदेशक, क्षेत्रिय विधि विज्ञान प्रयोगशाला उदयपुर थे।

डॉ. परमजीत सिंह ने बताया कि कार्यशाला पशु चिकित्सकों के वेटेरो लिगल केसेज समाधान में कौशलता प्रदान करेगी। ज्ञान एवं विज्ञान का समावेश होने पर ही सही न्याय की अपेक्षा की जा सकती है।

सरकार द्वारा किसानों की आय दुगुनी करने में पशु चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका है एवं आज की कार्यशाला इस कार्य में मील का पत्थर साबित होगी। इस अवसर पर संस्थान द्वारा प्रकाशित पशु चिकित्सा में फोरेंसिक पहलुओं का समावेश विषयक पुस्तिका का विमोचन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने कहा कि इस सेमिनार से पशु चिकित्सकों को पशुओं के शव विच्छेद की तकनीकी जानकारियों के साथ न्यायिक प्रकरणों में नीतिगत एवं न्यायपूर्ण कार्य प्रक्रिया अपनानें एवं इनकी कार्य कौशलता में अत्यधिक वृद्धि होगी।

उदयपुर संभाग में कार्यरत पशु चिकित्सकों में पशु चिकित्सा के न्यायिक प्रकरणों में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की सहायता लेने पर चर्चा की गई। जिसमें न्यायिक प्रकरणों में पशु चिकित्सक न्यायपूर्ण नीतिगत कार्य सम्पन्न करवा सके।

तकनीकी संयोजक डॉ. पदमा मील ने बताया कि कार्यशाला के प्रथम तकनिकी सत्र में डॉ. परमजीत सिंह ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला की संरचना एवं कार्य प्रणाली उदयपुर क्षेत्र के वन्यजीव अपराधो के विशिष्ट प्रकरणों एवं विद्युत आघात के प्रकरणों पर तथ्य रखे।

द्वितीय सत्र में विष विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता ने पशुओं एवं वन्यजीवों में सही नमूना संग्रहण एवं प्रेषण की प्रक्रिया व नमूनों की स्वीकृति/अस्वीकृति के सामान्य कारण विषय पर व्याख्यान दिया।

भोजन उपरान्त तृतीय सत्र में जीव व सीरम विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. पंकज पुरोहित ने पशु एवं वन्यजीवों के जैविक पहजू जिसमें डीएनए प्रोफाईलिंग का उपयोग भी शामिल है। प्रजातियों की पहचान, विवादित पितृत्व, नकली पशु अंग, डूबने के मामलों में मृत्यु विषयक व्याख्यान प्रस्तुत किया।

विषय विशेषज्ञों द्वारा खुली चर्चा में सभी चिकित्सकों ने भाग लिया एवं अपने विचार रखे। श्री जी. पी. पाठक वरिश्ठ वैज्ञानिक ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा क्षेत्रों में नमूने एकत्रित करने एवं जांच तैयार की गई मोबाईल वेन का प्रदर्शन किया एवं जानकारियां उपलब्ध कराई। प्रतिभागियों को कार्यशाला के संबंध में महत्वपूर्ण मूल्यांकन एवं सुझाव दिये गये। समापन सत्र में प्रमाण पत्र वितरित किये गये।