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महानवमी के दिन एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी द्वारा पशुओं की पूजा और भोज का आयोजन, दया और संवेदनशीलता का संदेश

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर: महानवमी के दिन एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी द्वारा पशुओं की पूजा और भोज का आयोजन, दया और संवेदनशीलता का संदेश इस साल महानवमी के पवित्र अवसर पर, एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी ने एक विशेष आयोजन किया, जिसमें पशुओं के प्रति प्रेम और सम्मान का संदेश दिया गया।
  • संस्था की प्रमुख सदस्य डॉ.
  • माला मट्ठा और किरण भावसार के नेतृत्व में इस कार्यक्रम में पशुओं की पूजा अर्चना की गई और उन्हें सम्मान देने के लिए विशेष भोज का आयोजन भी किया गया।
  • एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी ने इस अवसर पर समाज से यह अपील की कि महानवमी जैसे पवित्र दिन पर हमें अपने दिलों से पशुओं के प्रति घृणा और भेदभाव को नकारते हुए, उन्हें स्नेह और सम्मान देना चाहिए।
  • उन्होंने कहा, "जैसे हम महानवमी पर माता रानी की पूजा करते हैं, वैसे ही हमें अपने चार पैर वाले मित्रों का भी सम्मान और पूजा करनी चाहिए।
  • " इस कार्यक्रम में विशेष रूप से पशुओं को माता रानी की चुनरी पहनाई गई और उनके लिए भोज का आयोजन किया गया।
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 महानवमी के दिन एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी द्वारा पशुओं की पूजा और भोज का आयोजन, दया और संवेदनशीलता का संदेश

उदयपुर: महानवमी के दिन एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी द्वारा पशुओं की पूजा और भोज का आयोजन, दया और संवेदनशीलता का संदेश इस साल महानवमी के पवित्र अवसर पर, एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी ने एक विशेष आयोजन किया, जिसमें पशुओं के प्रति प्रेम और सम्मान का संदेश दिया गया।

संस्था की प्रमुख सदस्य डॉ. माला मट्ठा और किरण भावसार के नेतृत्व में इस कार्यक्रम में पशुओं की पूजा अर्चना की गई और उन्हें सम्मान देने के लिए विशेष भोज का आयोजन भी किया गया।

एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी ने इस अवसर पर समाज से यह अपील की कि महानवमी जैसे पवित्र दिन पर हमें अपने दिलों से पशुओं के प्रति घृणा और भेदभाव को नकारते हुए, उन्हें स्नेह और सम्मान देना चाहिए। उन्होंने कहा, "जैसे हम महानवमी पर माता रानी की पूजा करते हैं, वैसे ही हमें अपने चार पैर वाले मित्रों का भी सम्मान और पूजा करनी चाहिए।"

इस कार्यक्रम में विशेष रूप से पशुओं को माता रानी की चुनरी पहनाई गई और उनके लिए भोज का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य समाज में पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और दया का स्तर बढ़ाना था, ताकि हम एक समझदार और जिम्मेदार समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें।

संस्था की संस्थापिका डॉ. माला मट्ठा ने कहा, "यह पूजा केवल धार्मिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करती है – हम सभी जीवों के प्रति प्रेम और सहानुभूति से व्यवहार करें। भविष्य में भी इस तरह के आयोजन होते रहेंगे, ताकि समाज में पशुओं के प्रति जागरूकता बढ़े और उनका सम्मान सुनिश्चित हो सके।"

इस अवसर पर किरण भावसार ने भी समाज से आग्रह किया कि हम सभी अपने दयालुता के भाव को और अधिक सशक्त करें और अपने पशु मित्रों के साथ भी उतना ही प्रेम और सम्मान दर्शाएं, जितना हम अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ करते हैं।