माही के तट पर सुकून लुटाती है वागड़ की दीपावली!
भारत में दीपावली केवल दीपों की कतारें सजाने, लक्ष्मी-पूजन करने और आतिशबाजी के बीच खुशियाँ मनाने का पर्व नहीं है। यह देश की विविधतापूर्ण लोकसंस्कृतियों, परंपराओ…
“दौड़” के परिणाम
भारत में दीपावली केवल दीपों की कतारें सजाने, लक्ष्मी-पूजन करने और आतिशबाजी के बीच खुशियाँ मनाने का पर्व नहीं है। यह देश की विविधतापूर्ण लोकसंस्कृतियों, परंपराओ…
दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा, आस्था और जीवन-दर्शन का प्रकाशपर्व है। यह अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और निराशा पर आशा की विजय…
आतिशबाजी को हम चाहे जितना खुशी, उत्साह और उल्लास का प्रतीक मानते रहें, लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी उतना ही गंभीर और विचारणीय है। जिस शोर और धमाके को हम प्रसन्नता …
उदयपुर : त्योहारों का समय खुशियां मनाने, अपनों को उपहार देने और खरीदारी करने का होता है। इस दौरान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही माध्यमों पर आकर्षक छूट, सीमित समय क…
जयपुर, 30 जून।प्रिय सुबोध,स्हाशीर्वाद ! तुम्हारी पुस्तक "समकालीन" के विमोचन समारोह के कार्ड मिल गये हैं। विमोचनकर्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विराट स्वरूप का कार्…
उदयपुर । देश की एकता और अखंडता के शिल्पकार, लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में उत्साह और उमंग के साथ मनाई गई…
जैसलमेर । लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को जिला मुख्यालय पर ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया…
उदयपुर। सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर शनिवार को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर की ओर से शिल्पग्…
साइकिल की दुकान में काम करने वाले श्यामू की उम्र अब लगभग अस्सी वर्ष की हो चुकी थी। शरीर जवाब देने लगा था, हाथों में पहले जैसी ताकत नहीं रही थी, आँखों की रोशनी …
उदयपुर। 9वीं एनएल पंडियार मेमोरियल लेकसिटी इंटरनेशनल फिडे रेटिंग ओपन शतरंज टूर्नामेंट-2026 में चौथे दिन मुकाबले और भी रोमांचक हो गए। सातवें चक्र के बाद शीर्ष स…
उदयपुर। पीएफसी एजुकेशन की ओर से एसीसीए परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के सम्मान में शनिवार को विशेष अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। समार…
भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठानों अथवा परंपराओं के निर्वहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति, समाज और मानवीय संवेदनाओं के बीच आत्मी…