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राजस्थान विधानसभा में विधायक श्री बराड़ ने उठाया दत्तक ग्रहण प्रक्रिया का मुद्दा

मुख्य बिंदु
  • राजस्थान विधानसभा में सादुलशहर विधायक श्री गुरवीर सिंह बराड़ ने दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े अत्यंत संवेदनशील एवं जनहित के मुद्दे को प्रभावी रूप से उठाया।
  • उन्होंने सदन का ध्यान देश में गोद लेने के इच्छुक अभिभावकों की बढ़ती संख्या और कानूनी रूप से गोद लेने योग्य बच्चों की सीमित उपलब्धता के बीच बढ़ते असंतुलन की ओर आकर्षित किया।
  • विधायक ने बताया कि सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 26,734 पंजीकृत अभिभावकों के मुकाबले केवल 2,430 बच्चे कानूनी रूप से गोद लेने योग्य थे, जबकि 15 जुलाई 2025 तक यह अंतर बढ़कर 36,381 पंजीकृत अभिभावकों और मात्र 2,652 बच्चों तक पहुँच गया।
  • उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में औसतन प्रत्येक 13 अभिभावकों के लिए केवल 1 बच्चा उपलब्ध है, जिससे दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में गंभीर असंतुलन उत्पन्न हो रहा है।
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राजस्थान विधानसभा में विधायक श्री बराड़ ने उठाया दत्तक ग्रहण प्रक्रिया का मुद्दा

श्रीगंगानगर। राजस्थान विधानसभा में सादुलशहर विधायक श्री गुरवीर सिंह बराड़ ने दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े अत्यंत संवेदनशील एवं जनहित के मुद्दे को प्रभावी रूप से उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान देश में गोद लेने के इच्छुक अभिभावकों की बढ़ती संख्या और कानूनी रूप से गोद लेने योग्य बच्चों की सीमित उपलब्धता के बीच बढ़ते असंतुलन की ओर आकर्षित किया।

विधायक ने बताया कि सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 26,734 पंजीकृत अभिभावकों के मुकाबले केवल 2,430 बच्चे कानूनी रूप से गोद लेने योग्य थे, जबकि 15 जुलाई 2025 तक यह अंतर बढ़कर 36,381 पंजीकृत अभिभावकों और मात्र 2,652 बच्चों तक पहुँच गया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में औसतन प्रत्येक 13 अभिभावकों के लिए केवल 1 बच्चा उपलब्ध है, जिससे दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में गंभीर असंतुलन उत्पन्न हो रहा है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जटिल नियमों और धीमी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण अनेक बच्चे अधिक आयु के हो जाते हैं, जिससे उनके गोद लिए जाने की संभावना कम हो जाती है।

विधायक श्री बराड़ ने विशेष रूप से 0-4 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं त्वरित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में इच्छुक अभिभावकों को औसतन तीन वर्ष से अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ती है, जो बच्चों और अभिभावकों दोनों के हित में नहीं है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में कानूनी एवं प्रशासनिक बाधाओं को कम करते हुए प्रभावी नीति लागू की जाए, जिससे प्रत्येक बच्चे को शीघ्र परिवार का स्नेह मिल सके और कोई भी बच्चा प्रेम एवं संरक्षण से वंचित न रहे।

इस मुद्दे की गंभीरता और सामाजिक महत्व को देखते हुए सदन में उपस्थित अन्य माननीय विधायकों ने मेज थपथपाकर उनके प्रयासों की सराहना की तथा विषय को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इस पर सकारात्मक पहल की आवश्यकता जताई।

विधायक ने इस विषय को समाज के भविष्य और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए राज्य सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा व्यक्त की।