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Banswara News

श्री पीताम्बरा आश्रम में शरदोत्सव दुर्गार्चन महानुष्ठान की गूंज

विनायक पूजा एवं स्वस्तिवाचन से हुआ तीन दिवसीय महोत्सव का श्रीगणेश

मुख्य बिंदु
  • बांसवाड़ा | शक्ति उपासना के लिए प्रसिद्ध विन्ध्यवासिनी अष्टमी मण्डल की ओर से यहां श्री पीताम्बरा आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय शरदोत्सव दुर्गार्चन महानुष्ठान शनिवार को हेमाद्रि संकल्प एवं शुद्धिकरण अनुष्ठान के उपरान्त विनायक स्तवन एवं मंगलाचरण से शुरू हुआ।
  • इसके अन्तर्गत मुख्य साधक के रूप में ललित कुमार आचार्य एवं परिवार द्वारा अनुष्ठान आचार्य पं.
  • प्रदीप भट्ट के आचार्यत्व में भद्र सूक्त सहित विभिन्न सूक्तों का पठन, गणपति सहित विभिन्न देवी-देवताओं का आवाहन, देवी पूजा, पुण्याहवाचन आदि के साथ ही आश्रम के प्रधान देवताओं हनुमान, नर्मदेश्वर, पीताम्बरा आदि की पूजा-अर्चना की।
  • इसके बाद दैवी साधकों के समूहों ने सामूहिक दुर्गासप्तशती पाठ किए।
  • महोत्सव में भगवती मण्डल, गायत्री मण्डल, श्री पीताम्बरा आश्रम सहित विभिन्न धार्मिक संस्थाओं से जुड़े दैवी साधक हिस्सा ले रहे हैं।
  • तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को दिन भर शतचण्डी महानुष्ठान के अन्तर्गत दुर्गासप्तशती के सामूहिक पाठ का अनुष्ठान जारी रहेगा।
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श्री पीताम्बरा आश्रम में शरदोत्सव दुर्गार्चन महानुष्ठान की गूंज

बांसवाड़ा | शक्ति उपासना के लिए प्रसिद्ध विन्ध्यवासिनी अष्टमी मण्डल की ओर से यहां श्री पीताम्बरा आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय शरदोत्सव दुर्गार्चन महानुष्ठान शनिवार को हेमाद्रि संकल्प एवं शुद्धिकरण अनुष्ठान के उपरान्त विनायक स्तवन एवं मंगलाचरण से शुरू हुआ।

इसके अन्तर्गत मुख्य साधक के रूप में ललित कुमार आचार्य एवं परिवार द्वारा अनुष्ठान आचार्य पं. प्रदीप भट्ट के आचार्यत्व में भद्र सूक्त सहित विभिन्न सूक्तों का पठन, गणपति सहित विभिन्न देवी-देवताओं का आवाहन, देवी पूजा, पुण्याहवाचन आदि के साथ ही आश्रम के प्रधान देवताओं हनुमान, नर्मदेश्वर, पीताम्बरा आदि की पूजा-अर्चना की। इसके बाद दैवी साधकों के समूहों ने सामूहिक दुर्गासप्तशती पाठ किए।

महोत्सव में भगवती मण्डल, गायत्री मण्डल, श्री पीताम्बरा आश्रम सहित विभिन्न धार्मिक संस्थाओं से जुड़े दैवी साधक हिस्सा ले रहे हैं।

तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को दिन भर शतचण्डी महानुष्ठान के अन्तर्गत दुर्गासप्तशती के सामूहिक पाठ का अनुष्ठान जारी रहेगा। इसके साथ ही सूर्य आराधन, भैरवार्चन, रूद्र पूजा एवं आवाहित देवी-देवताओं का पूजन होगा।

महानुष्ठान के अंतिम दिन 26 अक्टूबर, सोमवार को शतचण्डी हवन होगा, जिसकी पूर्णाहुति शाम 5.30 बजे होगी।