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शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण पर तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन

श्रीगंगानगर। प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण को केंद्र में रखते हुए ‘खुशीशाला-खुद की खोज’ कार्यक्रम के अंतर्गत 22 से 24 सितंबर तक डाइट श्रीगंगानगर में तीन दिवसीय कार्यशाल

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श्रीगंगानगर। प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण को केंद्र में रखते हुए ‘खुशीशाला-खुद की खोज’ कार्यक्रम के अंतर्गत 22 से 24 सितंबर तक डाइट श्रीगंगानगर में तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्राथमिक विद्यालयों के 41 शिक्षकों ने सहभागिता निभाई।

तीन दिनों में गतिविधियों, समूह चर्चा, चिंतन, वीडियो एवं विद्यालय-कक्षा से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से शिक्षकों के मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संवाद किया गया। वर्तमान में रहना, करुणा रखना तथा अपने मूल्यों के अनुरूप कार्य करना जैसे विषयों पर विशेष रूप से अभ्यास कराया गया।

शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से यह समझ विकसित की कि तनाव और भावनाओं को बेहतर ढंग से समझते हुए इन अभ्यासों को अपने व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ कक्षा एवं विद्यालय की दैनिक गतिविधियों में कैसे शामिल किया जा सकता है।

साथ ही बच्चों के लिए सुरक्षित, सहयोगी एवं संवेदनशील वातावरण बनाने में शिक्षक की भूमिका पर भी चर्चा हुई।

कार्यशाला के साथ शिक्षकों के लिए 21 दिन हौसला अभ्यास कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी संवेदनाओं, भावनाओं, सामाजिक दायरे एवं संबंधों को समझने और आत्म-मूल्यांकन से जुड़े अभ्यास कर रहे हैं।

डाइट प्राचार्य श्रीमती रचना मेघा ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रशिक्षण में सीखी गई रणनीतियों को कक्षा में लागू करने के लिए प्रेरित किया।

डीआरयू प्रभारी श्रीमती प्रियंका ने बच्चों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर निरंतर कार्य करने तथा उनके पारिवारिक एवं सामाजिक संदर्भों को संवेदनशीलता से समझने की आवश्यकता बताई।

राज्य संदर्भ व्यक्ति श्रीमती ममता शर्मा ने सहभागितापूर्ण तरीके से विषय-वस्तु को शिक्षकों के साथ साझा किया और शिक्षक के स्वयं के मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण को भी महत्वपूर्ण बताया।

‘खुशीशाला-खुद की खोज’ के विषय विशेषज्ञ श्री अजमत एवं श्रीमती अंजू राणा ने कार्यशाला में तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत आगे भी तकनीकी सहयोग के माध्यम से विद्यालयों और कक्षाओं तक पहुंचकर शिक्षकों एवं बच्चों को सहयोग दिया जाएगा, ताकि कार्यशाला में सीखे गए अभ्यासों को विद्यालय की दैनिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सके।