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Literature News

पुस्तक समीक्षा प्रसून ( बाल काव्य निकुंज ) बच्चों में चेतना जगाती कविताएं

समीक्षक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल पत्रकार एवं लेखक कोटा

मुख्य बिंदु
  • लेखिका अक्षयलता शर्मा की कृति प्रसून - बाल काव्य निकुंज देश के भावी कर्णधारों बच्चों के लिए सार्थक संदेश परक कविताएं नैतिक ज्ञान वृद्धि की दृष्टि से बेहतर सृजन है।
  • बच्चों के लिए मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए 31 बाल कविताओं के साथ - साथ 10 काव्यमय पहेलियाँ बूझ कर दिमागी कसरत का भी मौका दिया है।
  • काव्य संग्रह की कविताएं बच्चों को गुरु का सम्मान करने, सफलता के लिए जीवन में अनुशासन का महत्व , अच्छे - अच्छे काम करने, सुबह सैर पर जाने, अभिमान नहीं करने, हिंदी भाषा से प्रेम करने, खूब मेहनत करने, अच्छा स्वास्थ्य जीवन की पूंजी है, ईश्वर के प्रति आस्था भाव रखने, कई उपयोगी उपदेश आदि की सीख देती हैं।
  • निश्चित ही जीवनोपयोगी कविताएं बच्चों को संस्कारवान बनाने में सहायक सिद्ध होंगी।
  • बाल कविताएं लेखिका के बाल मनोविज्ञान का आर्दश और अदभुत दर्शन भी प्रस्तुत करती हैं।
  • "सीखो जीना" कविता में प्रवासी पक्षियों के माध्यम से खुश रहने के संदेश की भावना को अभिव्यक्त करते हुए पृष्ठ 23 पर लिखती हैं...
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पुस्तक समीक्षा  प्रसून ( बाल काव्य निकुंज )  बच्चों में चेतना जगाती कविताएं

लेखिका अक्षयलता शर्मा की कृति प्रसून - बाल काव्य निकुंज देश के भावी कर्णधारों बच्चों के लिए सार्थक संदेश परक कविताएं नैतिक ज्ञान वृद्धि की दृष्टि से बेहतर सृजन है। बच्चों के लिए मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए 31 बाल कविताओं के साथ - साथ 10 काव्यमय पहेलियाँ बूझ कर दिमागी कसरत का भी मौका दिया है।

काव्य संग्रह की कविताएं बच्चों को गुरु का सम्मान करने, सफलता के लिए जीवन में अनुशासन का महत्व , अच्छे - अच्छे काम करने, सुबह सैर पर जाने, अभिमान नहीं करने, हिंदी भाषा से प्रेम करने, खूब मेहनत करने, अच्छा स्वास्थ्य जीवन की पूंजी है, ईश्वर के प्रति आस्था भाव रखने, कई उपयोगी उपदेश आदि की सीख देती हैं।

निश्चित ही जीवनोपयोगी कविताएं बच्चों को संस्कारवान बनाने में सहायक सिद्ध होंगी। बाल कविताएं लेखिका के बाल मनोविज्ञान का आर्दश और अदभुत दर्शन भी प्रस्तुत करती हैं।

"सीखो जीना" कविता में प्रवासी पक्षियों के माध्यम से खुश रहने के संदेश की भावना को अभिव्यक्त करते हुए पृष्ठ 23 पर लिखती हैं... देखो-देखो आए अतिथि/ दूर-दूर से न्यारे-न्यारे / सीखो इनसे कुछ तो सीखो/ बड़े गुणी हैं ये, प्यारे-प्यारे !

ये प्रवासी पक्षी हैं, बड़े चतुर हैं/ बड़े परिश्रमी, वक़्त भी पहचानते / आलस्य प्रमाद मोह बंधन नहीं इनके /आपदा हल करने की तुरत ठानते / जिन पेड़ों पर काटें रात-अंधेरे/ उन्हे संगीत सुनाते सांझ-सवेरे/ वक्त जरूरत फुर्र से उड़ जाते/सीखा है खुश रहना; सीखो जीना ।

" जरूरी है" कविता में परीक्षा के माध्यम से जीवन की किसी भी प्रतिस्पर्धा में न घबराने का सकारात्मक संदेश पृष्ठ 50 पर काव्यात्मक रूप से यूं दिया गया हैं........ मत घबराना परीक्षा से तुम, प्रतिद्वंद्वी से मत घबराना / हार जीत ही उन्नति का प्रोसिस, इससे और निखर जाना / घबरा जाने वाले सफल कभी हो न पाते, गिरते और संभल न पाते / प्रगति देख किसी की, अपने पिछड़ेपन का अहसास, विचलित कर न दे तुमको / सानी नहीं कोई किसी का, मात्र एक पहलू से तुलना का औचित्य नहीं है / हौड़ की दौड़ चुनौती है।

" करवट बदलना सीखो" जीवनोपयोगी भावों से परिपूर्ण रचना है जिसमें कई शिक्षाओं और उपदेशों का समावेश साफ दिखाई देता है।

पृष्ठ 57 पर कविता की बानगी देखिए.......... निकलो बाहर खुली हवा में, पैदल चलना सीखो / मोबाइल छोड़ो, मित्र बनाओ, ज़रा बतियाना सीखो / हड़प करें कुछ कोई तुम्हारा, उसे हथियाना सीखो / रहो नेक मगर, बेईमानों, गद्दारों को सबक सिखाना सीखो / कोई शोषण करें तुम्हारा, उससे बचना सीखो / कोई ठगे तुम्हें तो उसे ठगना सीखो / कोई पीछा करे तुम्हारा, उससे बचकर पीछे पड़ना सीखो / दुश्मन डराए तुम्हें अगर तो बल बढ़ाकर अपना, उसे डराना, और छकाना सीखो / बनो बहादुर, भयखाना घबराना मत सीखो ।

सीखो सतर्कता सीखो / करवट बदलता वक्त जब, तुम करवट बदलना सीखो ।

बच्चों को पहेलियां बूझने में खूब आनंद आता है और दिमाग की कसरत भी अच्छी खासी हो जाती है। इनकी काव्यात्मक एक पहेली पृष्ठ 70 पर....... गोल हूँ पर गोली नहीं, पेड़ पर मैं लगती हूँ, काँटों में भी फबती हूँ।

गंध मेरी प्यारी-प्यारी, काटो-चूसो, अचार बनाओ, गर्मी में शीतलता पाओ, मेहमानों को स्वादिष्ट पेय पिलाओ।

बूझो तो जानूँ, मैं कौन-सी चीज़?

( उत्तर : नींबू ) एक और पहेली पृष्ठ 75 पर यूं बुझती हैं.... तीन अक्षर का रंग हूँ, एक शाक के संग हूँ, उस पर मुझे है नाज, उसके सिर पर ताज ।

रंग का नाम बताएं आप, नहीं तो मैं नाराज़ ।

( उत्तर : बैंगनी ) पुस्तक के प्राक्कथन में डॉ. श्रीमती युगल सिंह लिखती हैं, " प्रसून, पुष्प, फूल, कुसुम जिस कोमलता एवं सुगंध का एहसास कराते हैं वही भाव पुस्तक के नाम से ही हृदय की वीणा के तारों को झंकृत कर देते हैं।

फूलों को देखकर प्रकृति के सुंदरतम स्वरूप के दर्शन से मानव मन सम्मोहित-सा एवं लुब्ध हो जाता है। नन्हे बालक स्वयं प्रसून सम आनंद प्रदान करते हैं।

बड़े-बड़ों का व्यथित हृदय बालकों की तुतलाती बोली सुनकर पुष्प सम खिल उठता है। बाल काव्य पुस्तक 'प्रसून' का शीर्षक भी कुछ इसी तरह आकृष्ट करते हैं।

भाषा सरल , सुबोध है। बच्चों को पसंद आएगी।"

प्रकाशक का अभिमत है , " जीवन की इस बगिया में बच्चे उन सुकोमल फूलों की तरह हैं जिनसे यह उपवन महकता है। उन्हें प्यार, दुलार और संभाल की जरूरत तो होती है लेकिन उनका प्यार पाना भी किसी मनुष्य के लिए जीवनदायी बूटी की तरह होता है।

प्रसून यानी पुष्प का संबोधन कवयित्री के इसी सहज स्नेही मन के कारण है। समाज और सामाजिकों का दायित्व है इन पुष्पों को पल्लवित होने के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करना और उन पर किसी प्रकार का संकट ना आने देना।

कवयित्री बच्चों के साथ अपने सहज बाल मन को घुला-मिला देती हैं और उसी से जन्म लेती हैं उनकी ये कविताएँ। ये बाल कविताएँ सिर्फ बच्चों के लिए नहीं बड़ों के लिए भी आनंदप्रद हैं।"

अपनी बात में लेखिका लिखती हैं, " हिंदी के प्रति बचपन से ही अभिरुचि जगानी होगी। हिन्दी के शब्द-ज्ञान में वृद्धि करनी होगी।

मेरा सुदृढ़ विश्वास ही नहीं प्रायोगिक तौर पर निकाला गया निष्कर्ष है कि हिंदी का अध्ययन अन्य विषयों के अध्ययन में भी सहायक है। रुचिपूर्वक पढ़ी गई उपयोगी प्रेरणा एवं जानकारी के साथ कविताएँ और कहानियाँ ताजगी देती हैं।

ये नीरस विषयजन्य अरुचि को दूर करती हैं। यही इस बाल पुस्तक का भी उद्देश्य है।" आवरण पृष्ठ आकर्षक है।

बच्चों के लिए उपयोगी काव्य निकुंज के लिए हार्दिक बधाई।

लेखिका संपर्क : 9461704390 पुस्तक : प्रसून ( बाल काव्य निकुंज ) विधा : बाल कविता रचनाकार : अक्षयलता शर्मा, जयपुर प्रकाशक : बोधि प्रकाशन जयपुर मूल्य : 150 रुपए ---------------- समीक्षक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल पत्रकार एवं लेखक कोटा