श्रीगंगानगर, रिद्धि सिद्धि कॉलोनी प्रथम के प्लैटिनम पार्क में श्री रामलीला सेवा समिति द्वारा आयोजित भव्य और हाईटेक रामलीला का पांचवां दिन गुरुवार रात को अत्यंत प्रभावशाली रहा।
रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को कलाकारों ने इतनी जीवंतता और भावप्रवणता के साथ मंच पर उतारा कि देखने आए हजारों भक्त श्रद्धा और भावुकता से अभिभूत हो गए।
समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि इस बार की रामलीला में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला है, जिससे दर्शकों को कथा का पूरा एहसास हो रहा है।आज के मुख्य अतिथि मुकेश शाह,हरीश जसूजा,रवि चमड़िया और सुनील गोयल का अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा, संरक्षक पवन वधवा,विधि मंत्री गुरमेश धींगडा एडवोकेट, कोषाध्यक्ष निखिल गोयल और महिला विंग प्रभारी मल्लिका धींगडा ने स्वागत किया।पांचवें दिन की शुरुआत स्वयंवर के बाद राजा जनक के महल से सीता की विदाई के प्रसंग से हुई।
मंच पर सीता की विदाई का दृश्य बेहद भावुक रहा, जिसमें जनकपुर से अयोध्या की ओर प्रस्थान की पीड़ा और आशीर्वाद दोनों ही झलके। इसके बाद दशरथ के दरबार में प्रभु श्रीराम के राजतिलक का निर्णय लिया गया।
राजतिलक की तैयारी को देखकर पूरा दरबार खुशी से झूम उठा, लेकिन आगे की कथा ने सब कुछ बदल दिया।अगले प्रसंगों में कौशल्या और कैकेयी के महलों में हो रहे वार्तालाप को दिखाया गया।
कैकेयी की वचन-जिद्द और मंथरा की साजिश के चलते राजा दशरथ अत्यंत दुखी मन से प्रभु श्रीराम को चौदह वर्ष के वनवास पर भेजने को मजबूर हो गए। इस दृश्य ने दर्शकों को गहराई से छू लिया।
प्रभु श्रीराम ने पिता की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए बिना किसी शिकायत के वनवास स्वीकार किया।
उनके साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण भी वन गमन के लिए प्रस्थान करने को तैयार हो गए।वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम और केवट का संवाद अत्यंत रोचक और भावपूर्ण तरीके से मंचित किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
प्रभु श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ का मृत्यु को प्राप्त होना, कैकेयी का पश्चाताप, कौशल्या महल का दुख, निषादराज और भरत का मिलन तथा राम-भरत मिलाप जैसे प्रसंगों ने पूरे पार्क को भावुक कर दिया।
अंत में भरत के दरबार में आकर प्रभु श्रीराम की खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर राज्य संचालन करने का दृश्य दिखाया गया।
मंचन के दौरान दर्शकों के बीच रामायण आधारित प्रश्नोत्तरी भी हुई,जिसमें आकर्षक पुरस्कार दिए गए।कलाकारों का शानदार अभिनयइन प्रसंगों के मंचन में कलाकारों ने अपने अभिनय से गहरी छाप छोड़ी।
कौशल्या की भूमिका में राधा गुनेजा, कैकेयी की भूमिका में सुषमा बत्रा, सुमित्रा की भूमिका में निधि कामरा, मंथरा की भूमिका में नैना, सीता की भूमिका में हरप्रीत, केवट और निषादराज की भूमिका में तुषार भाटिया, प्रभु श्रीराम की भूमिका में दिनेश शर्मा, लक्ष्मण की भूमिका में सुभेष देहडान, दशरथ की भूमिका में सुधीर गोयल, गुरु वशिष्ठ की भूमिका में संजय बजाज, सुमंत की भूमिका में अर्श गोयल, भरत की भूमिका में अजय सिवान और शत्रुघ्न की भूमिका में हार्दिक ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।
