उदयपुर। महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में तकनीकी कौशल प्रदान करने, वैज्ञानिक ज्ञान से अवगत कराने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सक्षम बनाने के उद्देश्य से महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय में 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत संचालित परियोजना“मेवाड़ की परंपरागत फसलों के प्रसंस्करण का उत्कृष्टता केंद्र”के तहत आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का संचालनअनुसंधान निदेशक डॉ. मनोज महाला के मार्गदर्शनमें किया गया। परियोजना अन्वेषकडॉ. कमला महाजनीने प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिक ज्ञान, खाद्य प्रसंस्करण की उन्नत तकनीकों, मूल्य संवर्धन तथा उद्यमिता विकास के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को स्थानीय कृषि उपज से पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद तैयार करने तथा इन उत्पादों को व्यावसायिक स्तर पर विकसित कर स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के लिए प्रेरित किया।
महाविद्यालय की अधिष्ठाताडॉ. सरला लखावतने अपने संबोधन में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने तथा लघु खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों की स्थापना के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान एवं कौशल का उपयोग कर मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण, विपणन तथा उद्यम स्थापना की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता (सीनियर रिसर्च फेलो) श्रीमती अंकिता पालीवालने मिलेट्स के पोषण संबंधी गुणों, संतुलित आहार में उनकी भूमिका तथा विभिन्न खाद्य उत्पादों के निर्माण में उनकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रागी, बाजरा, ज्वार एवं सांवा जैसे मिलेट्स से विविध पौष्टिक खाद्य उत्पाद विकसित कर उनके उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है। उचित प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन तकनीकों के माध्यम से स्थानीय कृषि उपज का बेहतर उपयोग करने के साथ खाद्य उद्यमिता की संभावनाओं को भी विकसित किया जा सकता है।
यंग प्रोफेशनल श्रीमती योगिता पालीवालने मिलेट्स आधारित मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इसके अंतर्गत मिलेट्स चॉकलेट, कुकीज़, चकली, सांवा मिलेट स्टिक्स, खाखरा, प्रोटीन बार, मुखवास, मोरिंगा मिलेट बार तथा मिलेट ठंडाई मिक्स तैयार करने की विधियों का प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों को कच्चे माल के चयन, सामग्री के उचित अनुपात, उत्पाद निर्माण एवं मानकीकरण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इसके साथ ही खाद्य स्वच्छता, सुरक्षित प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग तथा भंडारण से संबंधित तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागी महिलाओं को अमूल नमकीन, कलड़वास, उदयपुरका औद्योगिक अवलोकन भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान महिलाओं ने खाद्य प्रसंस्करण इकाई में उत्पादन व्यवस्था, मशीनों के संचालन, प्रसंस्करण तकनीकों तथा उत्पादों की पैकेजिंग संबंधी प्रक्रियाओं का अवलोकन किया। इस भ्रमण से प्रतिभागियों को औद्योगिक स्तर पर खाद्य उत्पादों के निर्माण एवं प्रबंधन की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिला। साथ ही, उन्हें उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के आधार पर स्वयं की लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करने तथा उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं में मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण की व्यावहारिक दक्षता विकसित करने, वैज्ञानिक प्रसंस्करण तकनीकों की जानकारी प्रदान करने तथा स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मेवाड़ क्षेत्र की पारंपरिक फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, स्थानीय कृषि संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने तथा महिलाओं के कौशल विकास, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।