उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–केंद्रीय कृषिरत महिला संस्थान (ICAR-CIWA), भुवनेश्वर के निर्देशन में संचालित अखिल भारतीय समन्वित कृषिरत महिला अनुसंधान परियोजना (AICRP-WIA) के उदयपुर केंद्र द्वारा राष्ट्रीय महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लालपुरा एवं हींता गांवों की 35 कृषक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को सम्मानित करना तथा उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों, श्रम-बचत उपकरणों, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम में सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सरला लखावत ने महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान, लोक संस्कृति, प्रकृति संरक्षण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने महिला किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियां अपनाने, उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करने तथा स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
खाद्य एवं पोषण विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. रेनू मोंगरा ने खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धित उत्पादों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर विकसित करने, कृषि उत्पादों का बेहतर उपयोग करने तथा उनका मूल्य संवर्धन कर आय बढ़ाने के व्यावहारिक उपाय बताए।
कार्यक्रम की मुख्य आयोजक डॉ. विशाखा सिंह ने महिला किसानों एवं ग्रामीण महिला उद्यमियों को डिजिटल मार्केटिंग के विभिन्न माध्यमों की जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादों का प्रचार-प्रसार करने, ग्राहकों तक सीधी पहुंच बनाने तथा बाजार से जुड़कर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर सफल महिला उद्यमी श्रीमती ललिता खटीक ने अपने द्वारा तैयार किए गए बहुउपयोगी बैग, क्रोशिया से निर्मित फूल एवं एप्रन प्रदर्शित किए। उन्होंने अपने उद्यमशीलता के अनुभव साझा करते हुए महिलाओं को हस्तनिर्मित उत्पादों एवं लघु उद्योगों के माध्यम से आय अर्जित करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
महिला किसानों के कृषि कार्यों को सुगम बनाने तथा उनके श्रम एवं समय की बचत के उद्देश्य से डॉ. हेमू राठौड़ ने विभिन्न उपयोगी उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इनमें आराम शीट, बहुउपयोगी झोला, मक्का छीलने के उपकरण, मूंगफली छीलने की मशीन (डिकॉर्टिकेटर) तथा सब्जी काटने के यंत्र शामिल थे। प्रतिभागियों को इन उपकरणों की उपयोगिता, कार्यप्रणाली एवं कृषि कार्यों में उनके संभावित लाभों की जानकारी दी गई।
इसके पश्चात महिला किसानों को कृषि यांत्रिकी एवं शक्ति विभाग का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस दौरान डॉ. सांवल सिंह मीणा ने ट्रैक्टर, ट्रॉली एवं अन्य कृषि उपकरणों के सुरक्षित संचालन, दुर्घटनाओं से बचाव तथा लघु कृषि यंत्रों की तकनीकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कृषि कार्यों के दौरान सुरक्षा संबंधी सावधानियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। महिला किसानों ने कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी परियोजना की कार्यशाला का भी भ्रमण किया। यहां डॉ. दीपक राजपुरोहित ने कृषि आधारित लघु उद्योगों में उपयोगी विभिन्न मशीनों का प्रदर्शन करते हुए उनकी कार्यप्रणाली समझाई। इनमें प्याज काटने, लहसुन छीलने तथा ग्वारपाठा (एलोवेरा) से गूदा एवं जेल निकालने वाली मशीनें प्रमुख थीं।
इस प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा उपलब्ध संसाधनों पर आधारित लघु उद्योग स्थापित करने की संभावनाओं से परिचित कराया गया। साथ ही, कृषि उत्पादों को उपयोगी एवं बाजार योग्य उत्पादों में परिवर्तित कर अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसरों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की संचालक डॉ. सुमित्रा मीणा ने दैनिक आहार में सोयाबीन के उपयोग तथा पोषण सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं को सोयाबीन सहित अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को संतुलित आहार में शामिल करने तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए जागरूक किया। उन्होंने परिवार के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार के लिए संतुलित आहार की भूमिका को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में यंग प्रोफेशनल सुश्री दीपिका, डॉ. कुसुम शर्मा, वंदना जोशी एवं चारवी व्यास का सक्रिय एवं सराहनीय सहयोग रहा।
