उदयपुररूदेवेंद्र धाम में विधि-विधान के साथ भक्तामर स्तोत्र एवं नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप संपन्न हुआ।
डॉ सुरेंद्र मुनि द्वारा शरीर में स्थित सात चक्र,सात मुद्राओं के साथ-साथ बीज मंत्रों के द्वारा विशेष विधि पूर्वक नवरात्रि के दूसरे दिवस साधना करवाई गई।इस अवसर पर प्रवचन देते हुए जैन संत डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि मानव का उत्थान क्षमा भाव से और पतन क्रोध से होता है।
उन्होंने कहा कि क्रोध एक ऐसी आग की तरह है जो व्यक्ति के तन, मन, धन और समूचे जीवन को नष्ट कर देती है। क्रोध प्रेम भाव को मिटा देता है और वर्षों पुरानी मित्रता को भी पल भर में समाप्त कर देता है।
इसलिए जब भी क्रोध का प्रसंग बने, तुरंत क्षमा और समता का प्रयोग करना चाहिए। हमारे भीतर अनंत ऊर्जा विद्यमान है, लेकिन क्रोध उस ऊर्जा को गलत दिशा में मोड़ देता है।
जीवन माचिस की तीली की तरह हैकृयदि इसका सही उपयोग किया जाए तो दीया जलता है और गलत इस्तेमाल से पूरा घर जल सकता है।डॉ. राजेन्द्र मुनि ने आगे कहा कि आज के दौर में व्यक्ति घरों में एसी चलाकर बैठता है, लेकिन दिमाग में क्रोध का हीटर जलता रहता है।
जिन रिश्तों को संवारने में 10 साल का समय लगता है, क्रोधावेश और अनुचित शब्दों के प्रयोग से वे रिश्ते मात्र 10 मिनट में टूट जाते हैं और जीवन भर की पीड़ा बन जाते हैं।
अतः हमें हर परिस्थिति में सकारात्मक (पॉजिटिव) रहने का निरंतर अभ्यास करना चाहिए।सभा के दौरान उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि द्वारा मंगल पाठ प्रदान किया गया।
इस मौके पर श्रावक संघ द्वारा दिल्ली जैन महासंघ के पदाधिकारियों अध्यक्ष शांति प्रसाद, विनोद जैन, राम निवास जैन आदि का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
