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दोनों घुटनों की रोबोटिक सर्जरी के बाद स्विमिंग में लौटे त्रिलोक पालीवाल, एशियन मास्टर्स के लिए किया क्वालीफाई

उदयपुर: उदयपुर के एक रिटायर्ड एक्साइज ऑफिसर ने पारस हेल्थ उदयपुर में बाइलेटरल रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट करवाने के बाद कॉम्पिटिटिव स्विमिंग में वापसी की है और पैराग्लाइडिंग शुरू की है। सर्जरी और रिहैबिलिटेशन के बाद उन्होंने

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दोनों घुटनों की रोबोटिक सर्जरी के बाद स्विमिंग में लौटे त्रिलोक पालीवाल, एशियन मास्टर्स के लिए किया क्वालीफाई

उदयपुर: उदयपुर के एक रिटायर्ड एक्साइज ऑफिसर ने पारस हेल्थ उदयपुर में बाइलेटरल रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट करवाने के बाद कॉम्पिटिटिव स्विमिंग में वापसी की है और पैराग्लाइडिंग शुरू की है।

सर्जरी और रिहैबिलिटेशन के बाद उन्होंने एक नेशनल-लेवल स्विमिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया और एशियन मास्टर्स स्विमिंग कॉम्पिटिशन के लिए क्वालिफ़ाई किया।

यहां वे एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए अपने पैशन को जारी रखते हुए भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

मरीज़ त्रिलोक पालीवाल को दोनों घुटनों में बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था। दर्द के कारण उनका चलना-फिरना दूभर हो गया था और वह रोज़ाना के काम भी मुश्किल से कर पा रहे थे।

पारस हेल्थ उदयपुर में उनका सफल बाइलेटरल रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट हुआ। इस सर्जरी को सीनियर ऑर्थोपेडिक और रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. आशीष सिंघल ने किया।

सर्जरी के बाद पालीवाल ने रिहैबिलिटेशन किया और धीरे-धीरे चलने-फिरने लगे। सर्जरी के बाद वह अपने शौक के काम जैसे कि एडवेंचर्स स्पोर्ट एक्टिविटी करने में सक्षम हुए।

पालीवाल के इलाज़ के बारे में बताते हुए पारस हेल्थ उदयपुर के सीनियर ऑर्थोपेडिक और रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. आशीष सिंघल ने कहा, “कई मरीजों को लगता है कि नी रिप्लेसमेंट के बाद ज़िंदगी मुश्किल हो जाएगी और उन्हें अपनी पसंदीदा एक्टिविटीज़ छोड़नी पड़ सकती हैं।

त्रिलोक जी का इलाज़ का सफ़र दिखाता है कि सही इलाज, रिहैबिलिटेशन और अनुशासित तरीके से मरीज़ सक्रिय लाइफस्टाइल में वापस आ सकते हैं।

रोबोटिक-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट हमें बहुत सटीकता के साथ प्रक्रिया करने और उसे पूरा करने में मदद करता है, जिससे इम्प्लांट की सही पोज़िशनिंग और अलाइनमेंट पाने में मदद मिलती है।

उनका सफ़र उन लोगों के लिए हिम्मत बढ़ाने वाला है जो घुटने के बहुत ज़्यादा दर्द के साथ जी रहे हैं लेकिन सर्जरी के बारे में सोचने में हिचकिचाते हैं।”

रोबोट की मदद से सर्जिकल टीम को दोनों तरफ की प्रक्रिया के दौरान इम्प्लांट की सही पोजिशनिंग और अलाइनमेंट पाने में मदद मिली। ऑपरेशन के बाद के रिहैबिलिटेशन से पालीवाल की रिकवरी में मदद हुई और उन्हें धीरे-धीरे अपने काम फिर से शुरू करने में फायदा हुआ।

अपनी उम्र या घुटने की पिछली समस्याओं को अपनी कोशिशों में रुकावट न बनने देने का पक्का इरादा करके पालीवाल स्विमिंग में वापस आए और राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले में हिस्सा किया। उन्होंने पैराग्लाइडिंग में भी सफलतापूर्वक हिस्सा लिया, एडवेंचर स्पोर्ट्स में अपनी दिलचस्पी बनाए रखी और घुटने के रिप्लेसमेंट के बाद शारीरिक रूप से मुश्किल एक्टिविटीज़ करने में अपना आत्मविश्वास दिखाया।

पालीवाल का अनुभव उन लोगों को हिम्मत देता है जो उम्र से जुड़ी जोड़ों की समस्याओं के बावजूद सक्रिय रहना चाहते हैं। पारस हेल्थ उदयपुर में उनका इलाज़ सही मेडिकल मदद, स्ट्रक्चर्ड रिहैबिलिटेशन और मरीज़ों को उनके लिए ज़रूरी काम करने में मदद करने के लिए उनके मज़बूत इरादे के महत्व को दिखाता है।