जयसमन्द/उदयपुर , राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (मैनेज) हैदराबाद एवं मत्स्य विभाग, राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आज 18 सितंबर 2026 को जयसमन्द में "एक्वा रीच" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जयसमन्द एवं डाया बंध की मत्स्य उत्पादक सहकारी समितियों के मछुआरा सदस्य को मत्स्य पालन संबंधी विभागीय योजनाओ की जानकारी एवं उन्हे इस व्यवसाय में सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम कार्यालय मत्स्य विकास अधिकारी, जयसमंद में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मत्स्य सहकारी समितियों के कुल 62 सदस्यों द्वारा भाग लिया गया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में विभाग की उप निदेशक (मत्स्य विस्तार) डॉ. दीपिका पालीवाल ने अतिथियों एवं प्रतिभागीयों का स्वागत कर कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। साथ ही जयसमन्द पर का शुन्य राजस्व मॉडल के तहत आदिवासी मछुआरों द्वारा किये जा रहे मत्स्याखेट कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल कुमार जोशी ने मछुआरों को मत्स्य पालन की विभागीय योजनाओं की जानकारी एवं इन पर देय अनुदान सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मैनेज हैदराबाद के कार्यक्रम समन्वयक श्री महिवाल सिंह ने प्रतिभागियो का स्वागत कर कार्यक्रम के उद्देश्य एवं संस्थान के कार्यकलापो के बारे में जानकारी दी। विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. अकील अहमद ने जयसमंद पर मत्स्याखेट के शून्य राजस्व मॉडल के संचालन में समितियों द्वारा अनुभव की जा रही कठिनाइयों एवं समाधान के बारे में जनजाति मछुआरों से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने जयसमंद पर गठित मत्स्य सहकारी समितियों की नियमित ऑडिट कराने, साधारण सभा की बैठके आयोजित करने एवं चुनाव इत्यादि की प्रकिया निर्धारित समय पर सहकारिता विभाग से समन्वय कर कराने का आहवान किया। साथ ही समिति सदस्यो को नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराने का सुझाव दिया। सज्जन सिंह सहायक मत्स्य विकास अधिकारी ने प्रतिभागीयों को बहुउद्देशीय मत्स्य सहकारी समिति गठन प्रकिया की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अन्त में डाया फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन के प्रवीण कुमार मीणा एवं धर्मेन्द्र मीणा, सहकारी समिति पाटण के व्यवस्थापक रतनलाल एवं सराडा समिति के लोकेश मीणा ने कार्यकम के बारे में अपने विचार व्यक्त कर इस प्रकार के कार्यक्रमों को उपयोगी बताया। अतिथियो द्वारा सभी प्रतिभागियो को प्रमाण पत्र वितरीत किये गये। डॉ. दीपिका पालीवाल, उप निदेशक (मत्स्य विस्तार) ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियो का आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया।
इससे पूर्व गुरुवार को संयुक्त निदेशक मत्स्य विभाग उदयपुर में मैनेज हैदराबाद द्वारा एक्वा उद्यमी कार्यशाला का आयोजन भी किया गया । राष्ट्रीय कृषि विकास प्रबन्ध संस्थान (मैनेज) हैदराबाद एवं मत्स्य विभाग, राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य मत्स्य पालकों एवं एक्वाप्रेन्योर्स को व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाना है । इस अवसर पर 65 से अधिक प्रतिभागी जिनमें मत्स्य किसान, मत्स्य ठेकेदार, मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्य, विभागीय अधिकारी एवं विषय विशेषज्ञों सहित विभाग के पूर्व उप निदेशक अरुण पुरोहित एवं संयुक्त निदेशक डॉ. अकील अहमद उपस्थित रहें।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मत्स्य विभाग राज. सरकार की निदेशक श्रीमती संचिता बिश्नोई ने अंतर्देशीय मात्स्यिकी में उद्यमिता के बढ़ते महत्व एवं नए अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया की राजस्थान में 4.30 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र मत्स्य पालन के लिए उपलब्ध है, जिसमें केज कल्चर, झींगा पालन, सघन मछली पालन, पर्याप्त बीज उत्पादन से मछली उत्पादन को बढ़ाने और रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और भारत सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है।
संयुक्त निदेशक डाॅ. अनिल कुमार जोशी, ने विभागीय योजनाओं, संस्थागत सहयोग और वित्तीय सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे नये उद्यमी लाभ उठा सके। काॅलेज आॅफ फिशरीज, उदयपुर के पूर्व डीन डॉ. एल एल शर्मा, डाॅ सुबोध कुमार शर्मा एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एम एल ओझा ने राजस्थान में मछली पालन की चुनौतियां, आधुनिक जलकृषि पद्धतियां और उत्पादन एवं गुणवत्ता बढाने की उन्नत तकनीकों पर अपने विचार व्यक्त किये।