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साहित्य और संगीत के रंगों में डूबा ‘शायराना उदयपुर’, झूमने को मजबूर हुए दर्शक

भजन, फिल्मी गीत, गजल, कविता, दोहे और लोकगीतों ने बांधा समां; मंच पर पहुंचकर दर्शकों ने किया कलाकारों का सम्मान

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साहित्य और संगीत के रंगों में डूबा ‘शायराना उदयपुर’, झूमने को मजबूर हुए दर्शक

उदयपुर। साहित्य और संगीत के सुरों से सजी महफिल में रविवार को ‘शायराना उदयपुर परिवार’ का समारोह यादगार बन गया। ऐश्वर्या कॉलेज, शोभागपुरा के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में भजन, प्रेम गीत, फिल्मी गाने, गजल, कविता, छंद, दोहे और लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों से अभिभूत श्रोता न केवल झूमने लगे, बल्कि मंच पर पहुंचकर उनका सम्मान भी किया।

समारोह में उदयपुर सहित आसपास के जिलों से आए साहित्यकारों, कवियों, गायकों और संगीत प्रेमियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बॉलीवुड फिल्म निर्माता एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. अजय मुंडिया थे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ लेखाधिकारी चंद्रप्रकाश बडारिया रहे, जबकि अध्यक्षता ऐश्वर्या कॉलेज की प्रबंध निदेशक डॉ. सीमा सिंह ने की।

कार्यक्रम प्रभारी दिव्यानी शर्मा ने बताया कि शायराना उदयपुर परिवार लंबे समय से साहित्य और संगीत के माध्यम से कलाकारों को मंच प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद शायरी, छंद, दोहे, पैरोडी और लोकोक्तियों के जरिए समारोह में साहित्यिक रंग भर दिए गए।

फिल्मों में प्रतिभाओं को अवसर देने की घोषणा

मुख्य अतिथि डॉ. अजय मुंडिया ने शायराना उदयपुर परिवार के प्रतिभाशाली गायकों और गीतकारों को फिल्मों में अवसर देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कला और संगीत के क्षेत्र में प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने आईवीएफ तकनीक की जानकारी साझा करते हुए संतानहीन दंपतियों से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने और विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान ज्ञान का वास्तविक आधार है और वैज्ञानिक प्रगति के माध्यम से भारत विश्व में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।

भजनों से गजलों तक बिखरे सुर

शारदा दहलवी, चंचल शर्मा और भावना जैन ने सामूहिक रूप से शिव एवं कृष्ण भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। युवा गौरव सूर्यवंशी ने गिटार पर फिल्मी गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। अन्य कलाकारों ने भी गीत, गजल, कविता और शायरी के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

किशनगढ़ की दिव्यानी शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए छंद, दोहे, गीत, गजल, कविता और पैरोडी की पंक्तियों से समारोह को रोचक बनाया। साहित्य और संगीत की विविध प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को अंत तक बांधे रखा।

विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने दी प्रस्तुति

समारोह में सोहनलाल लोहार, व्यवसायी किशन लोहार, ज्योतिषाचार्य नीलम कौशल, अमेरिकन हॉस्पिटल के डॉ. गोपाल राज गोपाल, गायिका राजकुमारी, कवि डॉ. राजकुमार राज, ओएनजीसी अधिकारी एस.डी. कौशल, अशोक परिहानी, शिक्षाविद् नारायणलाल लोहार, विदेश सेवा में रह चुकी चिकित्सक डॉ. शौकत परवीन, शिक्षा अधिकारी चिन्मय भट्ट, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक गिरीश राजपुरोहित, युवा गौरव सूर्यवंशी, यशवंत सालवी, किशनगढ़ की दिव्यानी शर्मा तथा वन विभाग के वरिष्ठ लेखाधिकारी हेमंत सूर्यवंशी सहित अनेक कलाकारों और गणमान्य लोगों ने सहभागिता की। राजसमंद के वरिष्ठ लेखाधिकारी चंद्रप्रकाश बडारिया भी समारोह में उपस्थित रहे। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े इन प्रतिभागियों की मौजूदगी ने साहित्य और संगीत की इस महफिल को विविधता प्रदान की।

साहित्य-संगीत को सर्वांगीण विकास का आधार बताया

समारोह की अध्यक्षता करते हुए ऐश्वर्या कॉलेज की प्रबंध निदेशक डॉ. सीमा सिंह ने कहा कि शिक्षा के साथ साहित्य और संगीत का समागम व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है। फिल्म निर्देशक चिन्मय भट्ट ने कहा कि संगीत भारत की आत्मा और देशवासियों की भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने बताया कि शायराना उदयपुर परिवार पिछले दो दशकों से इस सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में योगदान दे रहा है।

इस अवसर पर परिवार के वरिष्ठ कवि डॉ. राजकुमार राज द्वारा महर्षि वाल्मीकि पर लिखी गई संगीतबद्ध रचना का अतिथियों ने विमोचन किया।

गुमनाम शहीदों की गाथाओं ने किया भावविभोर

विश्व रिकॉर्डधारक मनोज आचालिया और डॉ. सीमा वेद ने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ज्ञात-अज्ञात घटनाओं तथा गुमनाम शहीदों की गाथाएं सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आयोजकों के अनुसार, मनोज आचालिया ने लगभग 21 हजार फीट कपड़े पर वाटरप्रूफ मार्कर पेन से ऐतिहासिक घटनाएं लिखकर विश्व की सबसे लंबी दीर्घ पट्टिका का रिकॉर्ड बनाया है।

देशभक्ति म्यूजिक एल्बम और लिटरेचर फेस्टिवल की तैयारी

शायराना उदयपुर परिवार के संस्थापक मनोज गीतांकर ने बताया कि आगामी दिनों में साहित्य एवं संगीत कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसके लिए इच्छुक प्रतिभागी पंजीकरण करा सकेंगे। परिवार देशभक्ति पर आधारित म्यूजिक एल्बम तैयार करने की योजना पर भी काम कर रहा है, जिसमें प्रतिभाशाली गायकों और सदस्यों को अवसर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कलाकारों को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आगामी समय में म्यूजिक फेस्टिवल और लिटरेचर फेस्टिवल भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकारों और संगीत कलाकारों की भागीदारी प्रस्तावित है।

समारोह में शामिल कलाकारों ने शायराना उदयपुर परिवार की निःशुल्क सांस्कृतिक गतिविधियों के 16 वर्षों के सफर को सामाजिक समरसता, एकता और सांस्कृतिक एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।