कोटा। 41 वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन एवं भारतीय योगिनी संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन कार्यशाला ने नेत्रदान का संदेश देश के विभिन्न राज्यों तक पहुँचाया।
गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस प्रेरणादायक कार्यशाला में अलग-अलग राज्यों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य केवल लोगों को नेत्रदान के महत्व से परिचित कराना ही नहीं था, बल्कि देश में कॉर्निया से होने वाली अंधता को कम करने के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी था।कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि नेत्रदान केवल एक दान नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी पहुँचाने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि समाज में आज भी नेत्रदान को लेकर अनेक भ्रांतियाँ हैं और इन्हें दूर करने के लिए जागरूक एवं संवेदनशील लोगों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।कार्यशाला के दौरान नेत्रदान की प्रक्रिया, परिवार की भूमिका, समय पर सूचना देने के महत्व तथा कॉर्निया अंधता के निवारण के लिए समाज द्वारा किए जा सकने वाले प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की गई।भारतीय योगिनी संघ की संस्थापिका एवं अध्यक्ष डॉ आर एच लता ने कहा कि,राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के इस आयोजन ने यह साबित किया कि जब संवेदनशील लोग एक उद्देश्य के लिए जुड़ते हैं, तो दूरी और राज्य की सीमाएँ मायने नहीं रखतीं—एक छोटा-सा संदेश भी देशभर में रोशनी की नई उम्मीद जगा सकता है।योगिनी संघ से जुड़े राष्ट्रीय एवं विभिन्न राज्यों की प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में विशेष रुचि दिखाई और अपने-अपने क्षेत्रों में नेत्रदान जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
प्रतिभागियों ने कहा कि वे न केवल स्वयं नेत्रदान के प्रति जागरूक रहेंगे, बल्कि अधिक से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुँचाकर कॉर्निया अंधता से मुक्त समाज बनाने के प्रयास में अपनी सक्रिय भूमिका भी निभाएंगे।इस आयोजन में विशेष सहयोग देने वाली अनिता नरूका ने भी नेत्रदान के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि “नेत्रदान का संदेश किसी एक शहर, संस्था या राज्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
जब देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग एक साथ जुड़कर इस दिशा में काम करेंगे, तभी हम कॉर्निया अंधता के अंधकार को वास्तव में कम कर पाएंगे।”कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी पहुँचाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
