कोटा। शाइन इंडिया फाउंडेशन को हमेशा नेत्रदान अंगदान और देहदान के नवाचारों के लिये, ना सिर्फ प्रदेश में बल्कि पूरे भारतवर्ष में जाना जाता है । संस्था के कई ऐसे नवाचार हैं, जिन्होंने हर उम्र और वर्ग के लोगों को अभियान में जोड़ने का प्रयास किया है ।
नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है,और रोशनी का महापर्व दीपावली आने को है। अंधकार पर प्रकाश की विजय के इस पर्व से पहले *शाइन इंडिया फाउंडेशन* ने एक बार फिर अनूठा संकल्प लिया है - जिसमें उन्होंने नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ पर,ऐसे इमोजी लगाए है, जिनकी काली आँखों को कॉर्निया की अंधता के कारण सफेद दिखाया गया है । यह सफेद रंग कॉर्निया ब्लाइंडनेस से जूझ रहे उन हजारों दृष्टिहीनों का प्रतीक है।
भोग जैसी आस्था का अनूठा नवाचार* संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ ने कहा कि, इस अभियान को एक आध्यात्मिक भाव से जोड़ा है।
जिस तरह हम थाली में भोग सजाकर भगवान के सामने रखते हैं,और मन में गहरी आस्था रखते हैं कि,भगवान ने भोग ग्रहण कर लिया, ठीक उसी प्रतीकात्मक भावना पर यह नवाचार बना है।
व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प-पत्र भरता है और फिर अपने हाथों से स्माइली की आँखों पर लगा सफेद रंग साफ करता है, तो उसके मन में वही आत्मिक संतुष्टि आती है कि,आज उसके लिए नेत्रदान संकल्प से कल दो लोगों की आँखों में रोशनी पहुंचेगी।
शहरवासियों के विचार : नेत्रदानी परिवार से सुनीता गोयल जॉली ने कहा कि, "यह तरीका बहुत ही सरल और दिल को छूने वाला है। बच्चे और युवा इस खेल-खेल वाले तरीके से जरूर जुड़ेंगे। यह हमें भी मोटिवेट करता है।"
विज्ञान नगर निवासी जिवेश ने कहा की,हमेशा से वह नेत्रदान संकल्प लेने में थोड़ा सा झिझके,परंतु आज जब इस नवाचार की प्रक्रिया को देखा और किया तो लगा कि, कितना सा छोटा सा कार्य,किसी के चेहरे पर खुशी ला सकता है,यह महसूस हुआ,और उन्होंने संकल्प पत्र भरा ।
अभियान से जुड़ी *निधि जैन* ने कहा, _"जब मैंने अपने हाथ से स्माइली की आँख साफ की तो मन में अजीब सी खुशी आई, लगा जैसे सच में किसी की आँखों में रोशनी भर दी हो।
यह सिर्फ फॉर्म भरना नहीं, एक एहसास है।"_ युवाओ को भा रहा है - नेत्रदान संकल्प का नवाचार एक कोचिंग में कार्यरत अंजलि नामदेव ने, जब गाड़ी पर लगे स्माइली की आंखों को सफेद देखा तो उन्होंने रुक कर पूरी बात को समझा और फिर जब उन्हें इसका अर्थ समझ आया तो उन्होंने, अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरकर तुरंत दो लोगों की आँखों में रोशनी पहचाने का सुंदर,मार्मिक अनुभव प्राप्त किया ।
ज्ञात हो कि इस नवाचार से अभी तक 130 से अधिक युवाओं ने स्व प्रेरणा से प्रेरित होकर अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरा है ।
*संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ का संदेश* इस अवसर पर *संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़* ने कहा, _"अंधकार को मिटाकर रोशनी का पर्व आने वाला है, तो क्यों ना इस पावन पर्व को मनाने से पहले हम दो दृष्टिहीनों की आँखों से अंधेरा दूर करने का एक संकल्प करें। सार्थक दिवाली, जब ही संभव है,जब दुनिया से जाने के बाद,आपकी आँखों से दो व्यक्तियों के अंधेरे जीवन में रोशनी पहुंचे ।
