कोटा। ICSSR द्वारा प्रायोजित राजस्थान भूगोल परिषद (RGA) के 52वें राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के अवसर पर कोटा विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष मानवता का स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा।
"विकसित भारत 2047 - एक भौगोलिक दृष्टिकोण" विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जहाँ देशभर के भूगोलवेत्ता विकसित भारत की रूपरेखा पर मंथन कर रहे थे, वहीं शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा द्वारा नेत्रदान, अंगदान और देहदान जागरूकता के लिए स्टॉल लगाकर विकसित भारत के लिए सबसे जरूरी - मानवीय दृष्टिकोण की अलख जगाई गई।
सम्मेलन में पधारे मुख्य अतिथि श्री हनुमान सिंह राठौड़, मुख्य वक्ता प्रो. एच.एस. शर्मा, कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत सहित सभी फैकल्टी, प्रोफेसर्स और छात्र-छात्राओं ने स्टॉल पर पहुंचकर जानकारी ली।
युवाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह: इस अवसर पर युवाओं में सेवा भाव का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला।
कुल 23 विद्यार्थियों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरकर मृत्यु के बाद भी दो लोगों की जिंदगी में रोशनी बनने का प्रण लिया, वहीं 12 युवाओं ने अंगदान का संकल्प लेकर मानवता की सबसे बड़ी सेवा के लिए हाथ बढ़ाया।
फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने बताया कि "विकसित भारत सिर्फ सड़कों और इमारतों से नहीं बनेगा, बल्कि तब बनेगा जब युवा मृत्यु के बाद भी जीवन देने की सोच रखेगा। कोटा विश्वविद्यालय के छात्रों ने आज यह साबित कर दिया।"
कार्यक्रम में प्रो. संतोष आनंद (अध्यक्ष RGA), प्रो. एस.एस. भट्ट (महासचिव RGA) सहित आयोजन मंडल ने इस पहल की सराहना की।
