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आज के भारत में गांधी और शास्त्री कितने प्रासंगिक?—पुस्तकालय में पाठक संवाद

कोटा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा में

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आज के भारत में गांधी और शास्त्री कितने प्रासंगिक?—पुस्तकालय में पाठक संवाद

कोटा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा में “पाठक संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की संवाद-थीम “आज के भारत में गांधी और शास्त्री : विचार, मूल्य और प्रासंगिकता” रही।

संवाद के दौरान संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गांधीजी के सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, सामाजिक समरसता और नैतिक आचरण के विचार आज भी समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज विभिन्न प्रकार के तनाव, असहमति और सूचनाओं की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब गांधीजी के सत्य एवं अहिंसा के सिद्धांतों पर पुनर्विचार आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का सादगीपूर्ण जीवन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। शास्त्रीजी का “जय जवान, जय किसान” का संदेश देश की सुरक्षा और कृषि व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करता है।

कार्यक्रम में डॉ. शशि जैन ने गांधीजी के विचारों को सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि उनके जीवन से सत्यनिष्ठा और सेवा की प्रेरणा मिलती है। रोहित नामा ने शास्त्रीजी की सादगी एवं प्रशासनिक जीवन में ईमानदारी को वर्तमान संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। सीमा वर्मा ने महिला सहभागिता, शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता के संदर्भ में गांधीजी के विचारों पर चर्चा की।

रोहित कुमार शर्मा, राधे बिहारी मालव, ईश्वर मीना एवं हरिओम नागर सहित पुस्तकालय के कर्मचारियों और पाठकों ने भी संवाद में सक्रिय भागीदारी करते हुए गांधी एवं शास्त्री के विचारों की वर्तमान सामाजिक, राष्ट्रीय एवं नैतिक संदर्भों में उपयोगिता पर अपने विचार रखे।

पाठकों ने कहा कि दोनों महापुरुषों की जयंती केवल स्मरण का अवसर न होकर उनके जीवन-मूल्यों को समझने और उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने का अवसर भी है। कार्यक्रम का उद्देश्य पाठकों को इतिहास के इन महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से जोड़ते हुए सत्य, अहिंसा, सादगी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा जैसे मूल्यों पर सार्थक संवाद स्थापित करना रहा।