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नाथद्वारा में सजेगा हिंदी साहित्य का महाकुंभ, देशभर से जुटेंगे 200 साहित्यकार

12 से 14 सितंबर तक ‘हिंदी लाओ, देश बचाओ’ समारोह; उपनिषद्, ‘हिंदी हूँकृति’, सम्मान समारोह, पुस्तक लोकार्पण और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन होंगे

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कोटा। हिंदी भाषा और साहित्य के संरक्षण, संवर्धन तथा प्रचार-प्रसार को समर्पित साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा की ओर से हिंदी दिवस के अवसर पर तीन दिवसीय ‘हिंदी लाओ, देश बचाओ’ समारोह का आयोजन 12 से 14 सितंबर तक श्री भगवती प्रसाद देवपुरा प्रेक्षागृह, नाथद्वारा में किया जाएगा। समारोह में देशभर के करीब 200 साहित्यकार, पत्रकार और संपादक भाग लेंगे।

साहित्य मंडल के प्रधानमंत्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन में हिंदी भाषा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-मंथन के लिए हिंदी उपनिषद् और ‘हिंदी हूँकृति’ के सत्र आयोजित होंगे।

इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले साहित्यकारों, पत्रकारों एवं संपादकों को स्मृति सम्मान, मानद उपाधियों और विभिन्न अलंकरणों से सम्मानित किया जाएगा।

समारोह में करीब 30 पुस्तकों का लोकार्पण, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और साहित्यकारों की नगर परिक्रमा प्रमुख आकर्षण होंगे।

देवपुरा ने बताया कि बाहर से आने वाले सभी साहित्यकारों के आवास और भोजन की व्यवस्था साहित्य मंडल की ओर से निशुल्क की जाएगी।

12 सितंबर को होगा भव्य उद्घाटन समारोह के प्रथम दिन शनिवार, 12 सितंबर को सुबह 9.15 बजे ‘हिंदी लाओ, देश बचाओ’ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। गणेश, सरस्वती एवं श्रीनाथजी वंदना, राष्ट्रभाषा गान, लोकनृत्य और योग प्रस्तुति के बाद विभिन्न विषयों पर व्याख्यान होंगे।

हिंदी उपनिषद् प्रथम में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात और जम्मू में हिंदी भाषा की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विद्वान अपने विचार रखेंगे।

इसी दिन जीवनलाल अग्निहोत्री स्मृति सम्मान से संतोष कुमार आर. जे. ‘जेमि’ तथा बृजकांत साहित्य सम्मान से उमेश पाठक को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा भगवतीप्रसाद देवपुरा स्मृति सम्मान, हिंदी भाषा विभूषण, हिंदी भाषा शिरोमणि, हिंदी साहित्य शिरोमणि और हिंदी काव्य शिरोमणि-विभूषण सहित विभिन्न मानद उपाधियों से देशभर के साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा।

दूसरे दिन हिंदी की राष्ट्रीय भूमिका पर मंथन रविवार, 13 सितंबर को हिंदी हूँकृति के साथ हिंदी भाषा भूषण और पत्रकार-सम्पादन प्रवीण जैसी मानद उपाधियों से साहित्यकारों एवं पत्रकारों का सम्मान होगा।

हिंदी उपनिषद् द्वितीय में ‘हिंदी की राष्ट्रीय मर्यादा और लोकतंत्रीय प्रतिमान’, ‘डिजिटल युग में हिंदी की भूमिका’, ‘गुजरात में हिंदी के बढ़ते कदम’, ‘हिंदी प्रचार : समस्या और समाधान’ तथा ‘ऊपरी असम में हिंदी की वर्तमान स्थिति’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वक्ता विचार रखेंगे।

रविवार रात 8 बजे से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें देश के मूर्धन्य कवि अपनी रचनाओं का काव्यपाठ करेंगे।

14 सितंबर को निकलेगी साहित्यकारों की नगर परिक्रमा सोमवार, 14 सितंबर को साहित्यकारों की नगर परिक्रमा निकाली जाएगी। यह संस्था परिसर से प्रारंभ होकर अहिल्याकुण्ड, ब्रजपुरा बाहर, सिनेमामार्ग, नईहवेली, उपलापायसा, रावतदरवाजा, कुम्हारवाड़ा, रिसालाचौक, कन्याशाला मार्ग, माणकचौक, चौपाटी बाजार, दिल्ली बाजार, गुर्जरपुरा, बड़ा बाजार, मंदिर पिछवाड़ा, विट्ठलनाथ मंदिर मार्ग, प्रीतमपोल, नया बाजार, मंदिर मार्ग, चौपाटी, सर्राफा बाजार और लाल बाजार होते हुए पुनः संस्था परिसर पहुंचेगी।

इसी दिन हिंदी हूँकृति एवं हिंदी उपनिषद् तृतीय में ‘विश्वभाषा की ओर हिंदी के बढ़ते कदम’, ‘बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे न हिय को शूल’, ‘देश की आत्मा : हिंदी’ और ‘जन-जन की भाषा है हिंदी’ जैसे विषयों पर विद्वान व्याख्यान देंगे।

समापन दिवस पर साहित्य, संस्कृति, संगीत, इतिहास, समाज-साहित्य सेवा तथा पत्रकार-सम्पादक प्रवर सहित विभिन्न मानद उपाधियों से अनेक साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही हिंदी साहित्य-काव्य भूषण की मानद उपाधि से भी देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों को अलंकृत किया जाएगा।

तीन दिवसीय यह आयोजन हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति जनजागरण के साथ देशभर के साहित्यकारों को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।