मुख्य सामग्री पर जाएँ
शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 उदयपुर · 29°C
Udaipur News

राजस्थान की रेत का रूखापन आदमी को पानीदार बनाता है और झीलों में पानी नहीं वीरों की कहानियां तैरती है- चेतन औदिच्य

मुख्य बिंदु
  • राजधानी जयपुर के जवाहर कला केंद्र में संस्कार भारती की ओर से हुए तीन दिवसीय लोक कला संगम महोत्सव रविवार को संपन्न हुआ।
  • इस अवसर पर लोक-चौपाल कार्यक्रम में बोलते हुए उदयपुर के कलाकार चेतन औदिच्य ने कहा कि राजस्थान की तासीर यह है कि रेत का रूखापन यहां आदमी को पानीदार बनाता है ।
  • यहां की मरुभूमि में जल कम है, परंतु यहां के लोगों मन गीला है ।
  • हमारा गौरव यह है कि यहां झीलों के पानी में वीरों की कहानियां तैरती है।
  • ’ वक्तव्य उन्होंने राजस्थानी लोक : मन, मिट्टी और परंपरा का देशज संसार विषय पर दिया।
  • महोत्सव में मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल हरिभाऊ बागडे तथा विशिष्ट अतिथि सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले थे।
WAf𝕏TGin🖨
राजस्थान की रेत का रूखापन आदमी को पानीदार बनाता है और झीलों में पानी नहीं वीरों की कहानियां तैरती है- चेतन औदिच्य

उदयपुर। राजधानी जयपुर के जवाहर कला केंद्र में संस्कार भारती की ओर से हुए तीन दिवसीय लोक कला संगम महोत्सव रविवार को संपन्न हुआ।

इस अवसर पर लोक-चौपाल कार्यक्रम में बोलते हुए उदयपुर के कलाकार चेतन औदिच्य ने कहा कि राजस्थान की तासीर यह है कि रेत का रूखापन यहां आदमी को पानीदार बनाता है ।

यहां की मरुभूमि में जल कम है, परंतु यहां के लोगों मन गीला है । हमारा गौरव यह है कि यहां झीलों के पानी में वीरों की कहानियां तैरती है।

’ वक्तव्य उन्होंने राजस्थानी लोक : मन, मिट्टी और परंपरा का देशज संसार विषय पर दिया। महोत्सव में मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल हरिभाऊ बागडे तथा विशिष्ट अतिथि सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले थे।

कार्यक्रम में पद्मश्री तिलक गीताई ने कहा कि पूरे देश में एक भी विश्वविद्यालय ऐसा नहीं है जहां पर पारंपरिक कला का पाठ्यक्रम हो ।

प्रसिद्ध रंगकर्मी अरुण प्रकाश व्यास ने इस बात पर बल दिया कि लोक परंपराएं जब तक अपने मूल रूप में व्यवहार में नहीं आएंगे तब तक हम अनेक समस्याओं से ग्रसित रहेंगे ।

सिंपली जयपुर मैगजीन की संपादक अंशु हर्ष ने हमारे जीवन के आसपास की लोक मान्यताओं के महत्व की ओर ध्यान दिलाया। प्रताप गौरव शोध केंद्र के निदेशक डा.विवेक भटनागर ने लोक जीवन की भारतीय अवधारणा पर व्याख्यान दिया।

जेकेके के इस भव्य लोक उत्सव में जयपुर जिला कलेक्टर डॉ जितेन्द्र कुमार सोनी, डॉ इन्दुशेखर तत्पुरुष, नारायण सिंह राठौड़ पीतल, डॉ गीता सामोद, तनेराज सिंह सोढा, डॉ अमिताराज गोयल आदि विद्वानों ने भाग लिया।

राजस्थान में पहली बार हो रहे श्लोक कला संगम में लोक जीवन से जुड़े सभी पक्षों पर कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। चितरां रो आंगण नाम से प्रदेश के चित्रकारों की मोहक कला प्रदर्शनी के साथ लोक भजन, लोक नृत्य, लोक गायन और विभिन्न लोक वाद्यों का विशेष आकर्षण था।

विभिन्न विषयों पर देश के अलग-अलग भागों से आए विशेषज्ञों ने राजस्थान के लोक परंपराओं की मेहता पर बोल दिया।

उत्सव में लोक जीवन की भारतीय अवधारणा, लोक दृष्टि विचार व्यवस्था और जीवन व्यवहार, राजस्थानी लोक मन मिट्टी और परंपरा का देशज संसार तथा पर्यटन पर्यावरण, लोक कला धरोहर से नवाचार तक, लोक देवता और सामाजिक समरसता, तथा लोक का अंतर बाह्य सांस्कृतिक स्वरूप पारिवारिक मूल्यों का आधार विषय पर विभिन्न सत्र आयोजित हुए।