दूसरों के दोष देखने के बजाय अपने भीतर झांकेंःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
उदयपुर, देवेन्द्रधाम स्थित महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि महावीर स्तुति हमें अपने भीतर के दोषों को देखने और …
“दोष” के परिणाम
उदयपुर, देवेन्द्रधाम स्थित महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि महावीर स्तुति हमें अपने भीतर के दोषों को देखने और …
’उदयपुर।’ भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व के आह्वान पर पूरे देश में चलाए जा रहे लोकतंत्र बचाओ - अराजकता हटाओ अभियान के तहत बुधवार को भारतीय जनता पार्टी…
जब किसी साहित्यकार की कविता या कहानी नाटककार के हाथ लगती है तब वह मंच पर खूब निखरती है | इसका अनुभव मुझे हाल ही मंचित हुए नाटक “ जामुन का पेड़ ” देख कर हुआ | उर…
जैसलमेर । जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल के दिशा-निर्देशों की पालना में जिला रसद अधिकारी सवाई राम सुथार के नेतृत्व में अवैध रूप से घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायि…
उदयपुर। हंसी के बीच चुभता सच। उर्दू के प्रसिद्ध अफसाना निगार स्वर्गीय कृष्ण चन्दर की कालजयी कहानी ‘जामुन का पेड़’ पर आधारित नाटक रविवार को संस्कृति मंत्रालय भार…
उदयपुर | बालश्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल बच्चों का रेस्क्यू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बेहतर पुनर्वास, शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रभावी…
उदयपुर बालश्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल बच्चों का रेस्क्यू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बेहतर पुनर्वास, शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रभावी क…
"मुस्कान भी तब ही अच्छी ,जब दाँत हो साफ़ और आँखों में रोशनी अच्छी..."स्वस्थ,समृद्ध भारत व अंधत्व निवारण के केंद्र सरकार के अभियान में सहयोग देने के लिए शाइन इं…
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में गुरुवार को नियमित प्रवचन के दौरान साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद दुर्लभ म…
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को आयोजित नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को नवपद ओली के नौवें पद ‘तप…
बदलते समय के साथ स्वतंत्रता की परिभाषा भी बदल रही है। आज की युवा पीढ़ी निजता, व्यक्तिगत पसंद और अपने निर्णयों को लेकर अधिक मुखर है। इसी दौर में ‘माय बॉडी, माय …
जब गलत को सही मान लिया जाएअधर्म केवल पूजा-पाठ से विमुख होना या धार्मिक परंपराओं का पालन न करना नहीं है। अधर्म वह मानसिकता है, जिसमें मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए…