उदयपुर बालश्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल बच्चों का रेस्क्यू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बेहतर पुनर्वास, शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाना भी जरूरी है।
बालश्रम के अधिकांश मामलों में बंधुआ श्रम के पहलू भी जुड़े होते हैं। ऐसे में रेस्क्यू किए गए बच्चों के मामलों में बंधुआ श्रम अधिनियम के तहत भी कार्रवाई होनी चाहिए।
इससे नियोजकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ बच्चों को पुनर्वास एवं आर्थिक सहायता का लाभ मिल सकेगा।
यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर धनंजय टिंगल ने अपनी दो दिवसीय उदयपुर यात्रा के अंतिम दिन हिरणमगरी सेक्टर-6 स्थित गायत्री सेवा संस्थान के विवेकानंद सभागार में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही l धनंजय टिंगल ने कहा कि सही प्राथमिकी दर्ज कर सभी संबंधित कानूनी धाराएं लगाने से दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई होगी और बच्चों के दोबारा बालश्रम में जाने की आशंका कम होगी।
सरकारी एजेंसियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से ही बालश्रम मुक्त समाज का सपना साकार हो सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने दक्षिण राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में बालश्रम की चुनौतियों और पुनर्वास की जरूरतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू के साथ बच्चों के दीर्घकालीन पुनर्वास के लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं।
इस अवसर एसोसिएशन फॉर वॉलिंट्री एक्शन के प्रतिनिधि दीप बेनर्जी ने बताया कि प्रदेश में बालश्रम मुक्त समाज के निर्माण एवं बाल संरक्षण विषय पर आकांक्षी जिलों में प्रतिनिधियों की नियुक्ति कर सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। इन जिलों में मॉडल आधारित नवाचार भी किए जाएंगे।
राजस्थान चाइल्ड एडवाइजरी ग्रुप के सदस्य ध्रुव कुमार कविया ने बजट के अभाव में उदयपुर के कई बाल गृह बंद होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूर्व में बाल गृहों में रहने वाले बच्चों की वर्तमान स्थिति का पता लगाने के लिए विशेष ट्रैकिंग की मांग की।
आर.केग के सदस्य एवं अलर्ट संस्थान के निदेशक बी.के. गुप्ता ने कोटड़ा, झाड़ोल और गोगुंदा क्षेत्र में बालश्रम की स्थिति बताते हुए 14 वर्ष से अधिक आयु के रेस्क्यू किए गए बच्चों के लिए कौशल विकास आधारित कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।
आदिवासी विकास मंच के प्रतिनिधि सरफराज एवं सहयोग संस्थान के याकूब ने विद्यालयों से लंबे समय से अनुपस्थित बच्चों की नियमित ट्रैकिंग की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मौसमी पलायन के कारण कई बच्चे दूसरे राज्यों और शहरों में चले जाते हैं, जिससे उनके मानव तस्करी और बाल श्रम का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है।
कार्यक्रम में राजस्थान चाइल्ड एडवाइजरी ग्रुप, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। धनंजय टिंगल के प्रथम बार उदयपुर आगमन पर उनका स्वागत किया गया। अंत में गायत्री सेवा संस्थान के नितिन पालीवाल ने आभार व्यक्त किया।
