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Udaipur News

दुर्लभ मनुष्य भव को आत्मकल्याण में लगाएं, गुरु भगवंतों के मार्गदर्शन से प्राप्त करें सम्यक ज्ञान

साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने समझाई समवशरण की महत्ता, 48 मिनट की साधना से मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने का संदेश

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में गुरुवार को नियमित प्रवचन के दौरान साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद दुर्लभ मनुष्य जन्म प्राप्त होता है।

इस अनमोल अवसर को संसार के मोह-माया में गंवाने के बजाय आत्मकल्याण और आध्यात्मिक उन्नति में लगाना चाहिए।

आत्मा के कल्याण का मार्ग दिखाने वाले शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु भगवंतों का मार्गदर्शन आवश्यक है।साध्वीश्री ने समवशरण की व्यवस्था का वर्णन करते हुए कहा कि गणधर भगवंत विशिष्ट पद पर विराजमान होते हैं।

उनकी संख्या निश्चित होने के कारण वे आगे बैठते हैं, जबकि केवलज्ञान प्राप्त महात्माओं की संख्या निश्चित नहीं होती। शास्त्रों में प्रत्येक व्यवस्था के पीछे विशेष औचित्य बताया गया है।

उन्होंने कहा कि संसार की अनेक बातों का ज्ञान नहीं होने पर भी जीवन चल सकता है, लेकिन परमात्मा के शासन और समवशरण की महत्ता समझना आत्मिक उन्नति के लिए जरूरी है।उन्होंने कहा कि आत्मा की यात्रा निगोद से शुरू होकर अनेक भवों से गुजरती है।

मनुष्य जन्म मिलने के बाद भी यदि व्यक्ति केवल संसार के चक्र में उलझा रहता है, तो वह अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य से दूर रह जाता है।

अब समय है कि इस चक्र पर विराम लगाकर आत्मकल्याण की दिशा में कदम बढ़ाया जाए।साध्वीश्री ने 48 मिनट की सामायिक और आध्यात्मिक साधना के महत्व को बताते हुए कहा कि आत्मिक उन्नति के लिए शुरुआत करना आवश्यक है।

अपने भीतर झांककर दोषों को पहचानें और उन्हें दूर करने के लिए गुरु भगवंतों से जुड़ें। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किया।