जब किसी साहित्यकार की कविता या कहानी नाटककार के हाथ लगती है तब वह मंच पर खूब निखरती है | इसका अनुभव मुझे हाल ही मंचित हुए नाटक “ जामुन का पेड़ ” देख कर हुआ | उर्दू के प्रसिद्ध कहानीकार स्वर्गीय कृष्ण चन्दर की व्यंग रचना ‘जामुन का पेड़’ पर जयपुर के नीरज गोस्वामी ने ऐसा ही कमाल दिखाया | एक संजीदा और अनुभवी रंगकर्मी नीरज गोस्वामी उसे एक शानदार नाट्य कृति बनाकर दिल जीत लिया | इसके मंचन व्यंग का पूरा रंग चढ़ाया प्रसिद्द रंगनिर्देशक ईश्वरदत्त माथुर ने | ऐसा इसलिए भी हुआ क्यों कि अधिकाँश कलाकार उम्रदराज़ थे | रंगमंच पर उनका अनुभव जादू ड़ाल रहा था | कुल 15 कलाकारों की टीम ने बीसियों किरदार निभाते अपने सहज और प्रभावी अभिनय से दर्शकों को 80 मिनट तक बांधे रखा |ऐसा भी लगा कि रंगमंच को बचाने में व्यावसायिक रंगकर्मियों से ज्यादा श्रेय शौकिया रंगकर्मियों को जाता है | यह अवसर था संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अधीन संचालित पश्चिम क्षेत्र सां स्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा आयोजित मासिक नाट्य प्रदर्शन ‘रंगशाला’ का | दर्शकों से खचाखच भरा शिल्पग्राम का दर्पण प्रेक्षागृह में ठहाके गूँजते रहे | नाटक में एक आम व्यक्ति की कहानी दिखाई, जो सचिवालय परिसर में गिरे जामुन के पेड़ के नीचे दब जाता है।
इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए एक-दूसरे पर दोष मढ़ते नजर आते हैं। वहीं आम जनता और विपक्षी नेता भी इस स्थिति का अपने-अपने हितों के लिए उपयोग करने से पीछे नहीं रहते है।
मदद के इंतजार में तड़पते इंसान और फाइलों में उलझे सिस्टम की विडंबना दर्शकों को हंसाया भी और सोचने को भी मजबूर किया | नाटक के कसे हुए व्यंग अब तक कानों में गूँज रहे हैं | मसलन ...हर सांस लेने वाला आदमी जिन्दा नहीं होता ... आप लोग क्लर्क हैं , आपसे फ़ाइल तो हिलती नहीं, पेड़ क्या हिलाओगे ...यार क्या तुम सेक्रेटेरियेट के कर्मचारी हो जो दिन में सोओगे .... आदमी ही है यहाँ दबा रहेगा, कोई पेट्रोल का दाम तो है नहीं जो बढ़ जाएगा ..साहित्य अकादमी के शब्द में आदमी का एहसास ज़रूर होता है लेकिन आदमी से उसका कोई वास्ता नहीं ... अरे अकादमी का काम है आदमी को दबाना , इस पेड़ ने कैसे दबा दिया ...| नाटक के निर्देशन में ईश्वरदत्त माथुर ने अपनी प्रतिभा का खासा प्रदर्शन किया | ख्यातनाम शायर लोकेश कुमार सिंह ने नाटक के गीत भी लिखे और नेता का ज़ोरदार रोल किया | संगीत और गायन सरदार गुरमिंदर सिंह पुरी(रोमी ) का था | नाटक के सभी कलाकारों ने अपनी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया | मनोज स्वामी, वेदान्त शर्मा ,अनीश अंसारी , यादवेन्द्र याद ,धनराज दाधीच, राहुल ,मोहिनुद्दीन खान,राजेन्द्र शर्मा (राजू) ,अशोक माहेश्वरी,आलोक चतुर्वेदी और अनुराग सिंह के साथ नीरज गोस्वामी तथा ईश्वरदत्त माथुर ने अपने उम्दा अभिनय से दर्शकों का खासा मनोरंजन किया | प्रकाश सिद्धांत भटनागर और मंच व्यवस्था मुकुल औदिच्य की थी | जयपुर की रंगशिल्प नाट्य समिति और पश्चिम क्षेत्र सां स्कृतिक केंद्र, उदयपुर की टीम बधाई की हकदार है | विलास जानवे -- संस्कृति कर्मी
