मुख्य सामग्री पर जाएँ
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 उदयपुर · 29°C
Udaipur News

तप आत्मशुद्धि का मार्ग, आसक्ति छोड़कर संयम अपनाएंःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

नवपद ओली के नौवें पद तप की महत्ता बताई, सुख-दुःख में समभाव रखने का दिया संदेश

मुख्य बिंदु
  • वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को आयोजित नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को नवपद ओली के नौवें पद ‘तप’ की महत्ता समझाई।
  • उन्होंने कहा कि नवपद ओली के नौ दिनों में नौ पदों के महत्व पर चिंतन कर उनके गुणों को जीवन में अंगीकार करने का प्रयास करना चाहिए।
  • तप आत्मशुद्धि का माध्यम है और यह व्यक्ति को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
  • साध्वीश्री ने कहा कि आज सुविधा प्रधान मानसिकता के कारण कुछ लोग स्वयं तपश्चर्या नहीं करते और दूसरों को भी तप करने से रोकते हैं।
  • तप की निंदा करना उचित नहीं है, क्योंकि तप के अनेक आध्यात्मिक लाभ हैं।
  • अनादिकाल की यात्रा में अनेक योनियों में जन्म लेने के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है, जिसमें पूर्ण शरीर और सभी इंद्रियां मिलती हैं।
WAf𝕏TGin✉🖨
तप आत्मशुद्धि का मार्ग, आसक्ति छोड़कर संयम अपनाएंःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को आयोजित नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को नवपद ओली के नौवें पद ‘तप’ की महत्ता समझाई।

उन्होंने कहा कि नवपद ओली के नौ दिनों में नौ पदों के महत्व पर चिंतन कर उनके गुणों को जीवन में अंगीकार करने का प्रयास करना चाहिए।

तप आत्मशुद्धि का माध्यम है और यह व्यक्ति को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है।साध्वीश्री ने कहा कि आज सुविधा प्रधान मानसिकता के कारण कुछ लोग स्वयं तपश्चर्या नहीं करते और दूसरों को भी तप करने से रोकते हैं।

तप की निंदा करना उचित नहीं है, क्योंकि तप के अनेक आध्यात्मिक लाभ हैं। अनादिकाल की यात्रा में अनेक योनियों में जन्म लेने के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है, जिसमें पूर्ण शरीर और सभी इंद्रियां मिलती हैं।

इसलिए इस दुर्लभ जीवन का सदुपयोग करना चाहिए।उन्होंने भोजन का उदाहरण देते हुए कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन करना आवश्यकता है, जबकि मन की इच्छाओं के अनुसार बार-बार स्वाद की तलाश करना आसक्ति है।

उपयोग और आसक्ति में अंतर समझना जरूरी है। हमें यह विचार करना चाहिए कि हम शरीर की जरूरत पूरी कर रहे हैं या मन की इच्छाओं के पीछे भाग रहे हैं।साध्वीश्री ने कहा कि सुख-दुःख केवल बाहरी घटनाओं पर निर्भर नहीं करते, बल्कि हमारी मनःस्थिति भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

व्यक्ति को निरंतर आत्मनिरीक्षण करते रहना चाहिए कि उसके विचारों और वचनों से किसी को पीड़ा तो नहीं पहुंच रही है।

दूसरों के आचरण में दोष खोजने के बजाय स्वयं के व्यवहार को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।मानसिकता को रेलवे की तीन प्रकार की पटरियों के उदाहरण से समझाते हुए उन्होंने कहा कि ब्रॉडगेज की तरह मजबूत व्यक्तित्व वाले लोग अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी विचलित हुए बिना अपना कर्तव्य निभाते हैं।

ऐसे व्यक्ति महापुरुष कहलाते हैं। मीटरगेज की तरह कुछ लोग सीमित परिस्थितियों में ही संतुलन बनाए रख पाते हैं, जबकि नैरोगेज की तरह छोटी-छोटी बातों पर विचलित होने वाले लोग विवादों में उलझ जाते हैं।प्रवचन के दौरान साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी और साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने मधुर गीत प्रस्तुत किया।