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श्रीगंगानगर से चंडीगढ़ रेलमार्ग की दूरी घटेगी राजपुरा-मोहाली नई रेल लाइन की हुई मंजूरी

श्रीगंगानगर सहित पंजाब के मालवा क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी नई रेल लाइन

मुख्य बिंदु
  • इलाके के लिए एक और बड़ी रेल उपलब्धि हासिल हुई है।
  • पंजाब सहित इस पूरे इलाके में लंबे समय से प्रतीक्षित राजपुरा-मोहाली नई रेल लाइन के निर्माण को पिछले दिनों मंज़ूरी मिलने से रेल यात्रियों की नई उम्मीदों का उदय हुआ है।
  • केंद्रीय रेलमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पिछले दिनों इसकी घोषणा प्रेस वार्ता में कर दी थी।
  • जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य भीम शर्मा के अनुसार इससे पंजाब सहित श्रीगंगानगर क्षेत्र के लोगों की 50 साल से भी ज़्यादा पुरानी मांग पूरी हो गई है।
  • लगभग 18 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर 443 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह मालवा क्षेत्र को पंजाब राज्य की राजधानी चंडीगढ़ से सीधे जोड़ेगी, उधर दूसरी ओर जब भी श्रीगंगानगर से चंडीगढ़ के लिए ट्रेन चलेगी तो ट्रेन का सफ़र काफ़ी कम हो जाएगा।
  • और यात्रियों के समय की बचत होगी वो अलग।
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श्रीगंगानगर से चंडीगढ़ रेलमार्ग की दूरी घटेगी राजपुरा-मोहाली नई रेल लाइन की हुई मंजूरी

श्रीगंगानगर। इलाके के लिए एक और बड़ी रेल उपलब्धि हासिल हुई है। पंजाब सहित इस पूरे इलाके में लंबे समय से प्रतीक्षित राजपुरा-मोहाली नई रेल लाइन के निर्माण को पिछले दिनों मंज़ूरी मिलने से रेल यात्रियों की नई उम्मीदों का उदय हुआ है। केंद्रीय रेलमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पिछले दिनों इसकी घोषणा प्रेस वार्ता में कर दी थी।

जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य भीम शर्मा के अनुसार इससे पंजाब सहित श्रीगंगानगर क्षेत्र के लोगों की 50 साल से भी ज़्यादा पुरानी मांग पूरी हो गई है।

लगभग 18 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर 443 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह मालवा क्षेत्र को पंजाब राज्य की राजधानी चंडीगढ़ से सीधे जोड़ेगी, उधर दूसरी ओर जब भी श्रीगंगानगर से चंडीगढ़ के लिए ट्रेन चलेगी तो ट्रेन का सफ़र काफ़ी कम हो जाएगा।

और यात्रियों के समय की बचत होगी वो अलग। इस नई रेल लाइन से मालवा क्षेत्र के सभी 13 जिले अब चंडीगढ़ से अच्छी तरह जुड़ जाएँगे।

इससे मौजूदा राजपुरा-अंबाला मार्ग पर यातायात सुगम होगा और अंबाला-मोरिंडा संपर्क छोटा हो जाएगा।

सभी उपलब्ध विकल्पों में से रेल प्रशासन द्वारा इस मार्ग को इसलिए चुना गया क्योंकि इसमें कृषि भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता सबसे कम है, जिससे कृषि गतिविधियों पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है।

यह परियोजना कपड़ा, विनिर्माण और कृषि सहित उद्योगों को बढ़ावा देगी। यह पंजाब के कृषि क्षेत्र को प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों और बंदरगाहों से जोड़ने वाला एक व्यापक नेटवर्क बनाएगी, जिससे निम्न सुविधाएँ प्राप्त होंगी।

पहले लुधियाना से चंडीगढ़ पहुँचने के लिए ट्रेनों को अंबाला होकर जाना पड़ता था, जिससे दूरी और समय दोनों बढ़ जाते थे। अब राजपुरा और मोहाली के बीच सीधा संपर्क होगा, जिससे यात्रा की दूरी लगभग 66 किलोमीटर कम हो जाएगी, साथ ही समय की बचत होगी सो अलग।

इस लाइन के बनने से कृषि उपज की तेज़ आवाजाही, राजपुरा थर्मल पावर प्लांट जैसे उद्योगों के लिए परिवहन लागत में कमी, धार्मिक स्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और पर्यटन क्षमता में वृद्धि, गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब, शेख अहमद अल-फारुकी, अल-सरहिंदी की दरगाह, हवेली टोडर मल, संघोल संग्रहालय आदि से कनेक्टिविटी इत्यादि शामिल है।