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Literature News

पैसों का खेल निराला

डॉ प्रेरणाश्री गौड़

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पैसों का खेल निराला

पैसों का खेल निराला पैसों का खेल निराला पराए भी हो जाते अपने रिश्ते भी खिलखिलाते जब ना होता हाथ में पैसा अपने भी पराए हो जाते जो होते पराए वह भी हो जाते दूर पैसों का खेल निराला यहां कोई किसी का नहीं रखवाला