मुख्य सामग्री पर जाएँ
सोमवार, 21 सितंबर 2026 उदयपुर · 29°C
Jaislmer news

जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, ओरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

मुख्य बिंदु
  • *उपखण्ड क्षेत्र जैसलमेर में लगभग 11 हजार बीघा भूमि ओरण प्रयोजनार्थ प्रस्तावित* जैसलमेर।
  • जिला प्रशासन जैसलमेर द्वारा पारंपरिक, धार्मिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण ओरण भूमि के संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
  • इसी क्रम में उपखण्ड अधिकारी जैसलमेर सक्षम गोयल के नेतृत्व में तहसील रामगढ़ क्षेत्र में व्यापक सर्वे कर लगभग 11 हजार बीघा भूमि को ओरण प्रयोजनार्थ प्रस्तावित किया गया है।
  • उपखण्ड अधिकारी सक्षम गोयल ने बताया कि पारंपरिक रूप से पूजनीय औरण स्थलों के संरक्षण एवं सीमांकन के लिए राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप स्थल निरीक्षण कर प्रस्ताव भिजवाए गए हैं।
  • यह कार्रवाई ओरण, देववन एवं पर्यावरणीय संरचनाओं के पुनर्जीवन की दिशा में जिला प्रशासन का ठोस कदम है।
WAf𝕏TGin🖨
जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, ओरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

*उपखण्ड क्षेत्र जैसलमेर में लगभग 11 हजार बीघा भूमि ओरण प्रयोजनार्थ प्रस्तावित* जैसलमेर। जिला प्रशासन जैसलमेर द्वारा पारंपरिक, धार्मिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण ओरण भूमि के संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में उपखण्ड अधिकारी जैसलमेर सक्षम गोयल के नेतृत्व में तहसील रामगढ़ क्षेत्र में व्यापक सर्वे कर लगभग 11 हजार बीघा भूमि को ओरण प्रयोजनार्थ प्रस्तावित किया गया है।

उपखण्ड अधिकारी सक्षम गोयल ने बताया कि पारंपरिक रूप से पूजनीय औरण स्थलों के संरक्षण एवं सीमांकन के लिए राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप स्थल निरीक्षण कर प्रस्ताव भिजवाए गए हैं। यह कार्रवाई ओरण, देववन एवं पर्यावरणीय संरचनाओं के पुनर्जीवन की दिशा में जिला प्रशासन का ठोस कदम है।

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान श्री वीर शिरोमणी आलाजी झुझार ओरण, पटवार मण्डल पूनमनगर राजस्व ग्राम दिलावर का गांव, श्री वीर शिरोमणी आलाजी झुझार ओरण राजस्व ग्राम कुछड़ी एवं मां स्वांगिया राय ओरण, ग्राम पूनमनगर की लगभग 11 हजार बीघा भूमि को ओरण प्रयोजनार्थ प्रस्तावित किया गया है।

इन स्थलों का उपखण्ड अधिकारी सक्षम गोयल द्वारा मौके पर निरीक्षण कर सीमांकन एवं राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करवाया गया है। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े पवित्र स्थलों की सुरक्षा करेगी, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन, जैव विविधता एवं जल संरक्षण को भी सशक्त बनाएगी।

जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि ओरण, देववन, गोचर, आगोर, तालाब, नाडी एवं पारंपरिक जल स्त्रोतों की भूमि पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा एवं इस दिशा में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।