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राष्ट्रीय कला मंदिर का जगजीतसिंह की स्मृति में शाम-ए- गजल कार्यक्रम रविवार को

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर में जन्मे, पले-पढे गजल सम्राट पदमभूषण स्व. जगजीतसिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए 11 अक्टूबर

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर में जन्मे, पले-पढे गजल सम्राट पदमभूषण स्व.

मुख्य बिंदु
  • श्रीगंगानगर में जन्मे, पले-पढे गजल सम्राट पदमभूषण स्व.
  • जगजीतसिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए 11 अक्टूबर रविवार को राष्ट्रीय कला मंदिर द्वारा संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम शाम-ए-गजल 11 अक्टूबर रविवार की शाम 6:15 बजे बाबा रामदेव मंदिर के सामने रोहित उद्योग परिसर में स्थित चौधरी रामजस सहारण सदन (ऑडिटोरियम) में आयोजित किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय कला मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद ने बताया कि इस अवसर पर प्रख्यात गजल गायक रजब अली जगजीतसिंह की गाई हुई कई मशहूर गजलों, नज़्मों और पंजाबी गीतों की प्रस्तुति देंगे।
  • उन्होंने बताया कि मुख्य अतिथि समाजसेवी रवि गोल्याण,मेहमान-ए-खास खास जिला कलेक्टर डॉ.
  • अमित यादव और विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुभाष चौधरी होंगे।
  • गजलसम्राट जगजीतसिंह को 2003 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।
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राष्ट्रीय कला मंदिर का जगजीतसिंह की स्मृति में शाम-ए- गजल कार्यक्रम रविवार को

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर में जन्मे, पले-पढे गजल सम्राट पदमभूषण स्व. जगजीतसिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए 11 अक्टूबर रविवार को राष्ट्रीय कला मंदिर द्वारा संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम शाम-ए-गजल 11 अक्टूबर रविवार की शाम 6:15 बजे बाबा रामदेव मंदिर के सामने रोहित उद्योग परिसर में स्थित चौधरी रामजस सहारण सदन (ऑडिटोरियम) में आयोजित किया जा रहा है।राष्ट्रीय कला मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद ने बताया कि इस अवसर पर प्रख्यात गजल गायक रजब अली जगजीतसिंह की गाई हुई कई मशहूर गजलों, नज़्मों और पंजाबी गीतों की प्रस्तुति देंगे।

उन्होंने बताया कि मुख्य अतिथि समाजसेवी रवि गोल्याण,मेहमान-ए-खास खास जिला कलेक्टर डॉ. अमित यादव और विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुभाष चौधरी होंगे।

गजलसम्राट जगजीतसिंह को 2003 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी आवाज़ दशकों तक गजल और नज़्म की दुनिया की पहचान रही।

श्रीगंगानगर में जन्मे, पले और बड़े हुए जगजीतसिंह की किशोरावस्था में गायन प्रतिभा को सबसे पहले राष्ट्रीय कला मंदिर ने ही पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया था।

इसी नाते संस्था हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखती है।

वीरेंद्र बैद ने जगजीत सिंह के प्रशंसकों और सभी गीत-संगीत प्रेमियों से अपील की है कि वे तय समय पर ऑडिटोरियम पहुंचकर इस संध्या का हिस्सा बनें।