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मात्स्यिकी महाविद्यालय, उदयपुर द्वारा शिक्षक दिवस पर मत्स्य क्षेत्र में उद्यमिता विकास पर विशेष व्याख्यान

शिक्षक दिवस के अवसर पर माननीय कुलगुरु प्रो. (डॉ.) प्रताप सिंह की प्रेरणा से विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार एवं स्वरोजगार की भावना को

शिक्षक दिवस के अवसर पर माननीय कुलगुरु प्रो. (डॉ.

मुख्य बिंदु
  • शिक्षक दिवस के अवसर पर माननीय कुलगुरु प्रो.
  • ) प्रताप सिंह की प्रेरणा से विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार एवं स्वरोजगार की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मात्स्यिकी महाविद्यालय, उदयपुर में एक विशेष ऑनलाइन विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया।
  • कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एक्वा डॉक्टर सॉल्यूशंस, कोलकाता के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.
  • देबतानु बर्मन ने “नीली क्रांति से नीली अर्थव्यवस्था” विषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति देते हुए भारतीय मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र की विकास यात्रा को वैज्ञानिक प्रजनन, मिश्रित पालन एवं झींगा क्रांति से लेकर आधुनिक सटीक एवं डिजिटल जलीय कृषि तक विस्तार से समझाया।
  • उन्होंने सेंसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-फ्लॉक, पुनर्चक्रणीय जलीय कृषि प्रणाली (आरएएस), जैव-सुरक्षा तथा आंकड़ा-आधारित मत्स्य फार्म प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
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मात्स्यिकी महाविद्यालय, उदयपुर द्वारा शिक्षक दिवस पर मत्स्य क्षेत्र में उद्यमिता विकास पर विशेष व्याख्यान

शिक्षक दिवस के अवसर पर माननीय कुलगुरु प्रो. (डॉ.) प्रताप सिंह की प्रेरणा से विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार एवं स्वरोजगार की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मात्स्यिकी महाविद्यालय, उदयपुर में एक विशेष ऑनलाइन विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एक्वा डॉक्टर सॉल्यूशंस, कोलकाता के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. देबतानु बर्मन रहे।

मुख्य वक्ता डॉ. देबतानु बर्मन ने “नीली क्रांति से नीली अर्थव्यवस्था” विषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति देते हुए भारतीय मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र की विकास यात्रा को वैज्ञानिक प्रजनन, मिश्रित पालन एवं झींगा क्रांति से लेकर आधुनिक सटीक एवं डिजिटल जलीय कृषि तक विस्तार से समझाया। उन्होंने सेंसर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-फ्लॉक, पुनर्चक्रणीय जलीय कृषि प्रणाली (आरएएस), जैव-सुरक्षा तथा आंकड़ा-आधारित मत्स्य फार्म प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, तकनीकी दक्षता एवं उद्यमिता के माध्यम से देश की नीली अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में मात्स्यिकी महाविद्यालय के बी.एफ.एस.सी. प्रथम एवं तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि के साथ-साथ मत्स्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, जलीय आहार, तकनीकी सेवाओं, नवोद्यम तथा अन्य संबद्ध क्षेत्रों में उपलब्ध उद्यमिता के अवसरों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न विषयों पर संवाद करते हुए अपने प्रश्न पूछे और व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।

महाविद्यालय के डीन डॉ. एल. एन. महावर ने विद्यार्थियों को कार्यक्रम में सक्रिय रूप से सहभागिता करने तथा विशेषज्ञ वक्ता के अनुभव एवं मार्गदर्शन से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने तथा मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र में उपलब्ध नवीन अवसरों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नितेश यादव, अतिथि संकाय सदस्य, मात्स्यिकी महाविद्यालय द्वारा किया गया। उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. देबतानु बर्मन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों को विषय के व्यावहारिक एवं व्यावसायिक पक्षों को समझने तथा भविष्य में मत्स्य क्षेत्र में उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।