जैसलमेर । देश की खाद्य तेल एवं दलहन आत्मनिर्भरता के लिए बेहतर फसल अलनीनों के प्रभाव से खरीफ में कम बारिश और डैमो के जल स्तर में भारी गिरावट रबी फसलों के लिए चुनौती बन रहा है।
इसलिए विभाग अधिक पानी चाहने वाली फसलों जैसे गेहूँ की जगह कम पानी चाहने वाली फसलों जैसे सरसों, चना और जौ की जलवायु अनुकूल किस्मों को उगाने की सिफारिश करता है।
जिले के आधे से ज्यादा कृषि क्षेत्र में कम पानी और हल्की मिट्टी है। उसी को देखते हुए सरसों और चना की परिस्थितियों के अनुकूल किस्मों को उगाकर कम लागत के साथ अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद जैसलमेर महावीर प्रसाद छीपा ने बताया कि इसके लिए सरसों की किस्म जैसे समय पर बुवाई (अक्टूबर के पहले सप्ताह से मध्य अक्टूबर) और भारी जमीन के लिए RH-1975 एवं RH-1706 का चयन अधिक पैदावार के साथ तेल की गुणवत्ता के लिए कर सकते है।
वहीं रेतीली एवं टिब्बा क्षेत्र में RH-1424, RH-725 या RH-761 तथा देरी से बुवाई (नवम्बर के पहले सप्ताह से मध्य नवम्बर) के लिए RGN-236 का चयन कर सकते है।
चने की सिंचित एवं समय पर बुवाई (अक्टूबर के पहले सप्ताह से मध्य अक्टूबर) के लिए GNG-2171 (मीरा) तथा पछेती बुवाई के लिए GNG-2261 (केशव) का चयन कर सकते है।
वहीं असिंचित क्षेत्र में GNG-2461 (मूमल) को उगाकर अच्छी पैदावार ली जा सकती है। साथ ही उन्होंने बताया कि बेहतर स्वास्थ्यए कम लागत एवं पोषण सुरक्षा के लिए अपनाए छिलका रहित जौ की नई किस्म DWRB-223 मधुमेह रोगियों के लिए वरदान है।
जबकि जिले के शुष्क क्षेत्रों में कम पानी के अनुकूल नकदी फसलों के रूप में ईसबगोल की GI-2, RI-89, RI-3025 व HI-5 तथा जीरा की RS-1, RZ-19 व RZ-223 जैसी उन्नत किस्में उगाकर कम लागत में शानदार पैदावार ली जा सकती है।
जल एवं जलवायु संकट के दौर में बदलना होगा गेहूँ उत्पादन का दृष्टिकोणः उन्होंने बताया कि अलनीनों के प्रभाव से बाँधो के जल स्तर में भारी गिरावट, बदलती जलवायु बढ़ते तापमान, सीमित सिंचाई जल और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच गेहूँ उत्पादन को अधिक जल-कुशल, जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ बनाने की आवश्यकता बढ़ रही है।
क्षेत्र में गेहूँ उत्पादन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में सिंचाई जल की उपलब्धता, बढ़ता तापमान और मौसम की अनिश्चितता शामिल हैं।
ऐसे में केवल अधिक उपज क्षमता वाली किस्मों पर निर्भर रहने के बजाय ऐसी किस्मों को उगाना चाहिए जो सीमित जल एवं स्थानीय जलवायु के अनुरूप स्थिर उत्पादन दे सकें।
इसी बदलते कृषि परिदृश्य में की केवल दो सिंचाई में पककर अधिक पैदावार देने वाली किस्में WH-1402, WH-1142 और DBW-296 क्षेत्र के किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प है।