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मन की चाह अनंत, इसका कभी अंत नहींःडॉ. सुरेन्द्र मुनि

उदयपुर, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेंद्र धाम में आयोजित धर्मसभा में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि आज मानव तन और धन के अभाव से उतना दुखी नहीं है, जितना अनियंत्रित मन की इच्छाओं से व्यथित है।

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मन की चाह अनंत, इसका कभी अंत नहींःडॉ. सुरेन्द्र मुनि

उदयपुर, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेंद्र धाम में आयोजित धर्मसभा में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि आज मानव तन और धन के अभाव से उतना दुखी नहीं है, जितना अनियंत्रित मन की इच्छाओं से व्यथित है।

मनुष्य की चाहतें अनंत हैं। एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी इच्छा जन्म ले लेती है, जिससे जीवन निरंतर तनाव और असंतोष में घिरा रहता है।उन्होंने कहा कि व्यक्ति छोटे मकान से बड़े मकान, सामान्य वाहन से महंगी गाड़ी और सीमित संपत्ति से अधिक धन की ओर बढ़ता रहता है।

इस अंतहीन तृष्णा में वह जीवन का वास्तविक आनंद खो देता है। भक्तामर का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि आचार्य मानतुंग ने सांसारिक इच्छाओं के शमन की भावना व्यक्त की थी।

परमात्मा के गुणानुवाद और भक्ति से आत्मा पवित्र होकर परम पद की ओर अग्रसर होती है।वहीं डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि अनंत पुण्योदय के बाद दुर्लभ मानव जीवन मिलता है।

इसे सांसारिक भोगों में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने मानव जीवन को अमूल्य रत्न बताते हुए कहा कि इसका सदुपयोग आत्मकल्याण में होना चाहिए।

धर्मसभा में महामंत्री सौभाग्य मुनि जी महाराज के जीवन दर्शन पर प्रश्न मंच तथा अंबेश गुरु महिला मंडल के द्वारा गुरु समर्पण गीत का आयोजन हुआ स महा साध्वी सोहन कंवर महिला मंडल द्वारा अन्न भंडारे का वितरण हुआ, जिसमें राह चलते सैंकड़ों लोगों ने लाभ लिया।