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मेरा’ भाव छोड़ आत्मा से जुड़ना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म

पर्युषण पर्व के नवम दिन अभिषेक-शांतिधारा के साथ हुई पूजा-अर्चना, आज चढ़ेगा भगवान वासुपूज्यनाथ के मोक्ष कल्याणक का निर्वाण लाडू

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मेरा’ भाव छोड़ आत्मा से जुड़ना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म

उदयपुर। सकल दिगंबर जैन समाज सेक्टर-14 की ओर से महावीर भवन में पर्युषण पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

पर्व के नवम दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म दिवस पर प्रातः भगवान श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई।

शांतिधारा का पुण्यार्जन इंदरलाल मुंडफोड़ा परिवार को प्राप्त हुआ।धर्मसभा को संबोधित करते हुए पंडित रविकीर्ति जी ने कहा कि बाहरी वस्तुओं, धन-संपत्ति, शरीर और मोह-माया के प्रति आसक्ति का त्याग करना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म है।

आत्मा के अलावा संसार की कोई भी भौतिक वस्तु, धन अथवा शरीर वास्तव में मेरा नहीं है,इस सत्य को स्वीकार करना और आत्मा में श्रद्धा रखना ही आकिंचन्य धर्म का सार है।इस अवसर पर सौधर्म इंद्र-इंद्राणी इंदरलाल जी एवं मंजू देवी मुंडलिया के सानिध्य में पूजा-अर्चना सहित विभिन्न मांगलिक कार्यक्रम संपन्न हुए।ट्रस्ट अध्यक्ष भंवरलाल मुंडलिया ने बताया कि चतुर्दशी के अवसर पर भगवान वासुपूज्यनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।

साथ ही सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा।ट्रस्ट महामंत्री भूरीलाल जैन ने सभी साधर्मियों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि पर्युषण पर्व के अंतिम दिवस की शांतिधारा के लिए लॉटरी सिस्टम के माध्यम से नाम चयन किया जाएगा।