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रबी फसलों की बुवाई के कार्य में किसान बेहतर ढंग से आवश्यक मात्रा में सभी उर्वरकों का करें समयबद्व सदुपयोग

जैसलमेर। वर्तमान में शीघ्र ही रबी फसलों की बुवाई का कार्य कृषकों द्वारा प्रारम्भ किया जायेगा। रबी फसलों में फॉस्फोरस तत्व के लिये कृषकों

जैसलमेर। वर्तमान में शीघ्र ही रबी फसलों की बुवाई का कार्य कृषकों द्वारा प्रारम्भ किया जायेगा।

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जैसलमेर । वर्तमान में शीघ्र ही रबी फसलों की बुवाई का कार्य कृषकों द्वारा प्रारम्भ किया जायेगा।

रबी फसलों में फॉस्फोरस तत्व के लिये कृषकों द्वारा मात्र डीएपी उर्वरक के प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है, जो कि उचित नहीं है।

दलहनी एवं तिलहनी फसलों में कृषकों को सिंगल सूपर फॉस्फेट उर्वरक का प्रयोग लाभदायक है क्योंकि सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक से 16 प्रतिशत फॉस्फोरस के साथ-साथ 11 प्रतिशत सल्फर भी फसलों को मिलता है।

सिंगल सुपर फॉस्फेट के वर्तमान में दो विकल्प उपलब्ध है- स्ट्रेट एवं फोर्टीफाईड विद जिक एवं बोरोन।

फसलों में फलन एवं उत्पादन में जिक एवं बोरोन अत्यन्त महत्वपूर्ण तत्व है. अन्य फसलों में भी फॉस्फोरस तत्व की पूर्ति के लिये सिंगल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग किया जा सकता है।

एक बैग डीएपी के स्थान पर 3 बैग सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 1 बैग युरिया का प्रयोग करना चाहिए।

संयुक्त निदेशक कृषि ( विस्तार) जिला परिषद जैसलमेर महावीर प्रसाद छींपा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि फास्फोरस तत्व की पूर्ति के लिये अन्य विकल्पों में मोनो अमोनियम फॉस्फेट (MAP), एनपीके (NPK). टीएसपी का प्रयोग भी कृषकों को करना चाहिए क्योंकि पौधा फॉस्फोरस तत्व को लेता है।

पौधे को फॉस्फोरस तत्व डीएपी, एमएपी या एनपीके किस उर्वरक से दिया जा रहा है, इससे पौधे को कोई फर्क नहीं पडता है। मोनो अमोनियम फॉस्फेट उर्वरक में 11 प्रतिशत अमोनिकल नाईट्रोजन एवं 52 प्रतिशत फॉस्फोरस तत्व है।

एमएपी उर्वरक पानी में घुलनशील है एवं मृदा में नमी होने पर तेजी से घुलता है। अतः फॉस्फोरस तत्व के स्त्रौत के रूप में मोनोअमोनियम फॉस्फेट का प्रयोग भी बराबर लाभदायक है एवं आर्थिक रूप से भी किसी प्रकार का अतिरिक्त व्यय नहीं होता है।

उन्होंने बताया कि इसी प्रकार एनपीके उर्वरक के कई कॉम्बीनेशन बाजार में उपलब्ध है जो नाईट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश तीनों मुख्य पौषक तत्व पौधों को उपलब्ध करवाते है एवं पौषक तत्व के आधार पर बराबर लाभदायक है।

इसलिए कृषक भाई किसी एक उर्वरक विशेष को ही उपयोग न करके फसल की पौषक तत्वों की सिफारीश की गई मात्रा के अनुसार आवश्यक मात्रा में सभी उर्वरकों का प्रयोग करें जिससे किसी उर्वरक विशेष की कमी से बचा जा सके एवं कृषकों का अनावश्यक समय एवं संशाधन खर्च नहीं हो।

ट्रिपल सुपर फॉस्फेट उर्वरक डीएपी के बराबर प्रभावी है. इस उर्वरक में भी डीएपी के समान ही 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होता है, परन्तु जल विलेय फॉस्फोरस डीएपी से 4 प्रतिशत ज्यादा होता है।

उल्लेखनीय हैं कि इन उर्वरकों की आपूर्ति भी ग्राम सेवा सहकारी समितियों, कय विक्रय सहकारी समितियों एवं प्राईवेट डिलर्स के पास प्रर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है इस संबंध में सभी किसान भाईयों से निवेदन है कि किसी भी प्रकार से घबरायें नहीं।

बुवाई के आवश्यक सभी उर्वरक समय पर सहकारी एवं निजी विक्रेताओं के यहां विभाग द्वारा उपलब्ध करवायें दिये जायेंगे। पुनः आग्रह है कि किसी विशेष व्यावसायिक उत्पाद के बजाय आवश्यक पोषक तत्वों के उपलब्ध विभिन्न विकल्पों यथा MAP, SSP, TSP, NPK का प्रयोग करें।

जैसलमेर जिलाः उर्वरक उपलब्धता स्थिति (स्टॉक विवरण) यूरियाः 1.27.437 बैग डीएपीः 38,530 बैग एनपीकेः 12.653 बैग सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी)ः 14,522 बैग