उदयपुर, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवशरण में धर्मसभा आयोजित हुई। डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि अज्ञान को केवल ज्ञान के प्रकाश से दूर किया जा सकता है।
संसार में मानव के परिभ्रमण का प्रमुख कारण उसका अज्ञान है।उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता। अज्ञान के कारण वह नश्वर पदार्थों को स्थायी मानकर उन्हें पाने में जीवन लगा देता है, जबकि संसार के सभी भौतिक पदार्थ यहीं रह जाते हैं।
भक्तामर स्तोत्र के रचयिता आचार्य मानतुंग जी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति से अज्ञान का अंधकार दूर हो सकता है।प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि जन्म और मरण एक-दूसरे के पर्याय हैं।
मनुष्य जन्म चाहता है, लेकिन मृत्यु से भयभीत रहता है, जबकि मृत्यु अगले जीवन का द्वार है।मुनि दीपेश ने कहा कि धन-संपत्ति, वैभव और स्वजन मृत्यु के समय साथ नहीं जाते।
मनुष्य केवल आत्म-तत्व लेकर आता है और उसी के साथ विदा होता है। कार्यक्रम में उपाध्याय रमेश मुनि एवं मुनि दीपेश ने मंगल भावना व्यक्त की।
इस अवसर पर महिला मंडल की सदस्यों एवं जैन कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षा पुष्पा गोखरू का स्वागत-अभिनंदन किया गया।------------------------------------------------------