उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेंद्र धाम, महावीर समवशरण में संवत्सरी समापन के पावन अवसर पर विशेष प्रवचन किया गया।समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव भगवान जिनका वर्णन विवेचन जैनागम ,वेद ,पुराण सभी में उपलब्ध हैं उन्हीं की आराधना स्वरूप कलयुग के कल्पवृक्ष श्रीमद् भक्तामर स्तोत्र का 48 दिवसीय साधना अनुष्ठान आज 17 सितंबर गुरुवार से प्रारंभ होगा जिसमें लाभ लेने हेतु जैन धर्मावलंबियों में अत्यंत उत्साह देखा जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान महावीर ने कठोर तप-जप की जीवनपर्यंत साधना कर केवल ज्ञान व केवल दर्शन प्राप्त किया और सिद्ध गति को वरण किया।
पाप-कर्म आत्मा के साथ जन्म-जन्मांतर से जुड़े रहते हैं, जिनका क्षय केवल निस्वार्थ व कठोर तप-जप की साधना से ही संभव है।सभा में प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने क्षमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि संसार को बढ़ाने वाले दो मुख्य तत्व राग और द्वेष है। इन दोनों को केवल क्षमा भाव के जरिए ही मिटाया जा सकता है।
स्थानीय जैन समाज में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के उपरांत क्षमापना पर्व श्रद्धा और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन,, महामंत्री हिम्मत बड़ाला एवं प्रबुद्ध जनों ने राग-द्वेष को त्यागने का आह्वान करते हुए परस्पर क्षमायाचना की।कार्यक्रम के दौरान समस्त नवकार महामंत्र के महाजाप के कलश एवं नवकार माला के लाभार्थियों का समाज द्वारा भावभीना सम्मान कर कलश अर्पण किए गए।
वहीं, बड़ी संख्या में तपस्या करने वाले तपस्वी भाई-बहनों का युवा परिषद द्वारा विधि-विधान से पारणा उत्सव संपन्न कराया गया।