उदयपुर। उदयपुर महिला अधिकार मंच के प्रतिनिधिमंडल द्वारा मंगलवार अपरान्ह को जिला कलक्टर उदयपुर को ज्ञापन सौंपकर 4 अक्टूबर को आयोजित महिला सुरक्षा मार्च में कॉकरोच पार्टी के बाहरी पुरूष कार्यकर्ताओ द्वारा छात्राओं से अभद्रता करने और मेवाड़ की वीरांगनाओं महारानी पद्मावती व किरण कुंवर के पोस्टर छीनने के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई।
ज्ञात हो कि 04 अक्टूबर 2026 रविवार को उदयपुर में आयोजित महिला सुरक्षा विषयक मार्च में स्थानीय छात्राओं ने भी भाग लिया। छात्राओ से कुछ युवको ने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास से संबंधित वीरांगनाओं के पोस्टर्स को छीन लिया और धक्का-मुक्की कर अभद्रता की गई। इस दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव किया।
जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर उक्त बाहरी पुरूषों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई।
साथ ही इकोसिस्टम के रूप में उदयपुर का वातावरण खराब करने के उद्देश्य से निरंतर चल रहे षड़यंत्र से संबंधित निम्न तथ्य निवेदन किए - 1) एक पोस्टर में मेवाड़ की राजकुमारी किरण कुंवर के साहस को दिखाया गया था, जिसमें वह बादशाह अकबर द्वारा की गई अभद्रता का प्रतिरोध करते हुए दिखाई देती है। एक अन्य पोस्टर में जौहर को मेवाड़ का स्वाभिमान बताया गया था और अपमान ना सहने की मेवाड़ी भावना को व्यक्त किया गया था।
अकबर की ओर से आगरा में 'नौरोज' पर्व पर मीना बाजार का आयोजन होता था, जिसमें राजघरानों की महिलाओ को ही जाने की अनुमति थी।
मेले में भेष बदलकर आये अकबर ने दुर्व्यवहार का प्रयास किया, तो किरण देवी ने अपनी कटार निकाल ली और पलक झपकते ही अकबर को जमीन पर गिरा दिया और उसकी छाती पर पैर रखकर अपनी कटार उसकी गर्दन पर रख दी।
बीकानेर स्थित जुनागढ़ दुर्ग स्थित संग्रहालय में किरण देवी के साहस को दिखाती यह पेंटिंग लगी हुई है। किरण कुंवर महाराणा प्रताप के छोटे भाई शक्ति सिंह की पुत्री थी और बीकानेर के पृथ्वी राज राठौड़ की पत्नी थी।
पेंटिंग पर लिखा है - “किरण सिंहणी सी चढ़ी, उर पर खींच कटार।
भीख मांगता प्राण की, अकबर हाथ पसार॥” 2) मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का सुर्य तिलक है साका-जौहर - दूसरे पोस्टर में महारानी पद्मिनी व वीरांगनाओं द्वारा आक्रांताओं के विरुद्ध स्वाभिमान के लिए किये गये जौहर को दिखाया गया। साथ ही लगातार मेवाड़ की गौरवशाली इतिहास का अपमान किये जाने का विरोध प्रदर्शित किया गया था।
फैमिनिज्म के नाम पर निरंतर मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, विशेषकर जौहर पर अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही है। साका व जौहर के बारे में कथित प्रगतिशील लोग जानते तक नहीं है। वे रानी पद्मावती व वीरांगनाओं पर तो सवाल करते है, लेकिन गौरी, गजनवी, खिलजी जैसे दुर्दांत दमनकारी कबिलाई आक्रांताओं के विरुद्ध सवाल नहीं खड़े करते है! आखिर प्रश्न किस पर उठाया जाना चाहिए?
जब ऐसे दुर्दांत आक्रांता हमला करते तो योद्धा बचाव में वीर गति को प्राप्त हो जाने तक आन-बान की रक्षा के लिए लड़ते थे। जब सुरक्षा के सभी प्रयत्न समाप्त हो जाते तो रानियां व दुर्ग की वीरांगनाएं जौहर का निर्णय लेती थी। ताकि मृत्यू के उपरान्त भी कबिलाई आक्रांता उनके शरीर को स्पर्श ना कर सके।
3) दिल्ली प्रोटेस्ट में जौहर के विरुद्ध पोस्टर- प्रोटेस्ट के क्रम में 30 सितंबर 2026 को दिल्ली में एक तख्ती लहराई गई जिसमें ऊपर के भाग में समलैंगिक पात्र का फोटो और नीचे के भाग में रानी पद्मिनी के पात्र का फोटो दिखाया गया। इस तरह नियमित रूप से मेवाड़ की संस्कृति को टारगेट किया जा रहा है।
4) स्वरा भास्कर द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणी- 31 अगस्त को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में चर्चा के दौरान कम्यूनिस्ट नेता स्वरा भास्कर द्वारा जौहर पर विवादित वक्तव्य देते हुए कायरता से तुलना की थी। जिस पर मेवाड़ सहित पूरे राजस्थान में आक्रोश व्याप्त हो गया था। सर्वसमाज को उक्त वक्तव्य से ठेस पहुंची थी।
5) नवरात्रि के पूर्व देवी पुजा पर कटाक्ष - हम माँ भवानी की आराधना करने वाले समाज है। नवरात्रि से ठीक पहले हमारी बच्चियों को उकसाना और देवी पुजा पर कटाक्ष करते हुए स्लोगन का उपयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण षडयंत्र लगता है।
6) मेवाड़ की आध्यात्मिक परंपरा गवरी पर टिप्पणी - उदयपुर में कथित रूप से घुमने आये एक युवक द्वारा आराध्य शिव-शक्ति के जनजाति समाज के भक्त को बुलाकर गवरी साधना पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर वायरल किया गया था। मेवाड़ की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अपमान पर पूरे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त हो गया था। वह युवक उदयपुर में घुमने आया या फिर किसी एनजीओ की योजना से आया, यह भी जांच का विषय है।
7) विवादित मेनन को उदयपुर आमंत्रण- 23 सितंबर 2026 को रमा मेहता ट्रस्ट द्वारा जेएनयू से जुड़ी रही प्रोफेसर निवेदिता मेनन को "सुरक्षा या निगरानी" विषय का व्याख्यान प्रस्तावित था। प्रो निवेदिता हमेशा देशविरोधी व संस्कृति विरोधी बयान देती रही है।
8) सुखाड़िया विश्वविद्यालय में विवादित सत्र - मार्च 2025 को सुखाडिया विश्वविद्यालय उदयपुर में महिला दिवस के उपलक्ष में रमा मेहता ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में बुक रीडिंग के तहत छात्राओं से "इनसाइड द हवेली" पुस्तक के चयनित पृष्ठ पढ़वाये गये , जिससे यह विचार को बल दिया गया कि उदयपुर महल में विवाह होकर आई बहु को स्थानीय परंपराओ के कारण प्रताड़ना हुई हो।
उक्त सभी तथ्यों के साथ निम्न २ मुख्य मांगे की गई है - १) क्रमगत उदयपुर में लगातार युवाओं को भ्रमित कर विवाद उकसाने और मेवाड़ के गौरव के विरुद्ध नरेटिव स्थापित करने के योजनाबद्ध षड़यंत्र चलाया जा रहा है, जिसमें कुछ स्थानीय एनजीओ की भूमिका संदिग्ध है, उनकी जांच किये जाने की भी मांग की गई है।
२) उदयपुर में 4 अक्टूबर को आयोजित मार्च में छात्राओं से अभद्रता करने और मेवाड़ गौरव के पोस्टर हटवाने वाले बाहरी युवकों के विरुद्ध कार्रवाई करने बाबत यह प्रतिनिधिमंडल आपसे निवेदन करता है।
