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Udaipur News

परमात्मा के प्रति प्रेम और समर्पण जागे, तभी धर्म बनेगा जीवन का आधार

संसार पर जितना भरोसा करते हैं, उतना परमात्मा पर करें; मृत्यु अटल है, उसे महोत्सव बनाने की तैयारी करेंःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को आयोजित नियमित व्याख्यान में श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि भगवान महावीर ने संसार के प्रत्येक जीव के कल्याण और आत्मा में समाधि रस के अनुभव के लिए देशना दी।

हमें यह अद्भुत जिनशासन प्राप्त हुआ है, लेकिन विचार करना होगा कि हमारे हृदय में परमात्मा के प्रति भक्ति, प्रेम और समर्पण के भाव कितने जागृत हुए हैं।उन्होंने कहा कि केवल धर्म का पालन करना पर्याप्त नहीं है, उसके प्रति गहरी आसक्ति और श्रद्धा भी होनी चाहिए।

यदि परमात्मा के प्रति हृदय में रोमांच और प्रेम का भाव उत्पन्न नहीं हो रहा है तो हमें अपने भीतर झांककर कारण तलाशना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गंदगी होने पर दुर्गंध आती है।

गंदगी हटाने के बाद भी दुर्गंध रहे तो उसके कारण को खोजना जरूरी है। इसी तरह पूजा-पाठ और दर्शन करने के बावजूद यदि अपेक्षित भाव नहीं जाग रहे हैं तो आत्मचिंतन आवश्यक है।साध्वीश्री ने कहा कि आज मनुष्य संसार और धन पर अधिक भरोसा करता है।

हमें स्वयं से पूछना चाहिए कि जितना विश्वास धन पर है, उतना परमात्मा पर है या नहीं। भाग्य, पुण्य और पुरुषार्थ जीवन को प्रभावित करते हैं।

आज किया गया पुरुषार्थ ही भविष्य का भाग्य बनता है।उन्होंने कहा कि मृत्यु को सदैव सामने रखकर जीवन जीना चाहिए। मृत्यु अटल है और उसके आने की आहट शरीर की कमजोरी, दृष्टि व श्रवण शक्ति में कमी जैसे संकेतों से मिलती रहती है, लेकिन मनुष्य उसे समझ नहीं पाता।

इसलिए मृत्यु से पहले जीवन को ऐसा बना लेना चाहिए कि मृत्यु भय का कारण नहीं, बल्कि महोत्सव बन जाए। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।