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विश्व शिक्षक दिवस पर शान्तिपीठ में परिचर्चा आयोजित

शिक्षक समाज को सकारात्मक दिशा देने में निभाएं अग्रणी भूमिका

मुख्य बिंदु
  • विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर शान्तिपीठ संस्थान द्वारा एक परिचर्चा का आयोजन किया गया।
  • परिचर्चा में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान शताब्दी को उल्लास की शताब्दी बनाना है तो शिक्षकों को निःसंकोच आगे आना होगा और समाज की उनसे अपेक्षाओं को पूरा करने का बीड़ा उठाना होगा।
  • राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डॉ.
  • श्रीकृष्ण जुगनू ने कहा कि शिक्षक ऐसा कुछ कर जाए कि शताब्दियां पढ़ें और कई पीढ़ियां आगे बढ़ें।
  • उन्होंने कहा कि जीवन एक है, लेकिन उसके आयाम अनेक हैं और हर आयाम सभी के लिए प्रेरक एवं अनुसरणीय होना चाहिए।
  • शिक्षक के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण को सदैव प्रासंगिक बनाए रखने के लिए समकालीन परिस्थितियों पर दृष्टि रखना आवश्यक है।
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विश्व शिक्षक दिवस पर शान्तिपीठ में परिचर्चा आयोजित

उदयपुर । विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर शान्तिपीठ संस्थान द्वारा एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान शताब्दी को उल्लास की शताब्दी बनाना है तो शिक्षकों को निःसंकोच आगे आना होगा और समाज की उनसे अपेक्षाओं को पूरा करने का बीड़ा उठाना होगा।

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने कहा कि शिक्षक ऐसा कुछ कर जाए कि शताब्दियां पढ़ें और कई पीढ़ियां आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जीवन एक है, लेकिन उसके आयाम अनेक हैं और हर आयाम सभी के लिए प्रेरक एवं अनुसरणीय होना चाहिए। शिक्षक के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण को सदैव प्रासंगिक बनाए रखने के लिए समकालीन परिस्थितियों पर दृष्टि रखना आवश्यक है। ऐसी पहल सभी को करनी चाहिए।

पूर्व नगर निगम आयुक्त दिनेश कोठारी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित यह दिवस केवल शिक्षकों के लिए ही नहीं है, बल्कि उनके साथ हम सभी को खड़ा होना चाहिए।

विश्व संगठन ने भी ऐसी ही अपेक्षा जताई है। उन्होंने कहा कि कोई भी शासन रहा हो, राजा ने गुरु की वंदना ही की है।

पूर्व आईएएस सुमति लाल बोहरा ने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन में ही हम अपने जीवन का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि पारिवारिक जीवन में भी गुरु को आमंत्रित करना आवश्यक माना जाता है।

डॉ. कमल सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे हमारा भविष्य गढ़ते हैं। आज के एआई और डिजिटल युग में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो चुकी है।

शान्तिपीठ संस्थापक अनंत गणेश त्रिवेदी ने ‘स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान सर्वत्र पूज्यते’ का संदर्भ देते हुए कहा कि शिक्षक को स्वतंत्र चेता के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए और किसी भी दबाव में नहीं आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज का इको सिस्टम हमेशा परिवर्तनशील है, किन्तु उसे निरंतर सकारात्मक दिशा देने में प्राथमिक भूमिका शिक्षक की है। दुनिया की सकारात्मक शक्तियों को एकजुट करते हुए आशावादी माहौल बनाने के लिए शिक्षकों को साहस के साथ आगे आना चाहिए।