उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के सेवातीर्थ स्थित वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी में आयोजित ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सेवा, त्याग, समर्पण और क्षमा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ या कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला प्रेरणास्रोत है। इसके प्रत्येक प्रसंग में मानवीय मूल्यों और आदर्श जीवन की सीख छिपी है।
अग्रवाल ने भक्त भरत के त्याग, शत्रुघ्न की निःस्वार्थ सेवा, अशोक वाटिका में त्रिजटा और सरमा के सहयोग, निषादराज गुह एवं महर्षि भारद्वाज की आत्मीयता, महामंत्री सुमंत्र के समर्पण तथा माता कैकेयी के प्रति भगवान श्रीराम की क्षमाशीलता के प्रसंग सुनाए।
भरत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने बताया कि श्रीराम के वनवास के बाद भरत ने राजसिंहासन स्वीकार करने से इनकार कर दिया और उनकी चरण पादुकाओं को सिंहासन पर विराजमान कर स्वयंसेवक भाव से राज्य का दायित्व निभाया। 14 वर्षों तक नंदीग्राम में रहकर उन्होंने त्याग और भाई के प्रति अटूट प्रेम का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह प्रसंग सिखाता है कि पद से बड़ा दायित्व और अधिकार से बड़ा समर्पण होता है।
शत्रुघ्न के जीवन प्रसंग के माध्यम से अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने सदैव भरत का साथ निभाया और बिना किसी पद अथवा प्रसिद्धि की अपेक्षा के अपने दायित्वों का निर्वहन किया। भगवान श्रीराम की आज्ञा से लवणासुर का वध कर उन्होंने ऋषियों को भयमुक्त कराया तथा मधुपुरी की स्थापना की, जिसे आगे चलकर मथुरा के नाम से जाना गया। उनका जीवन सिखाता है कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें कर्तव्य को प्राथमिकता दी जाए और श्रेय की अपेक्षा न रखी जाए।
अग्रवाल ने रामायण के अन्य प्रसंगों के माध्यम से सहयोग, आत्मीयता और क्षमा के महत्व बताए। उन्होंने बताया कि जीवन में रिश्तों की गरिमा बनाए रखने, दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने और परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों पर अडिग रहने की प्रेरणा रामायण से मिलती है।
बच्चों के साथ मनाई दीपावली कार्यक्रम के साथ ही संस्थान में आवासीय विद्यालय एवं नारायण चिल्ड्रन एकेडमी के बच्चों के साथ दीपावली का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों को पटाखे एवं मिठाइयाँ वितरित की गईं। बच्चों ने उत्साह और उमंग के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। आयोजन ने सेवा, अपनत्व और खुशियां बांटने के संदेश को भी साकार किया।
