जिला कारागृह में भागवतम् महोत्सव संपन्न* बांसवाड़ा।
वृन्दावन से पधारे इस्कॉन के प्रचारक ब्रम्हचारी आचार्य द्विज राज प्रभु ने नश्वर शरीर को चोरी अपराध की जगह भगवान की भक्ति में लगाए तभी जीवन का कल्याण सम्भव है।
उन्होंने कहा कि अपराध प्रवृत्ति आसुरी होती है जिसका दण्ड जिस देश के नागरिक है उसके संविधान के तहत् दण्ड अवश्य मिलता ही है किन्तु मृत्यु के पश्चात् परलोक में भी दण्ड का अवश्य विद्यान होगा।
तो इस नश्वर शरीर को भगवत कार्य में भक्ति में लगाए तभी जीवन मरण से मुक्ति सम्भव है।
उन्होंने कहा कि कर्म कभी भी पीछा नहीं छोड़ते है सद्कर्मों से भक्ति, सेवा, सत्कार , ईश्वर भजन ओर सात्विक भोजन मिलता है किन्तु आसुरी प्रवृति से अपराध ओर दुर्गुण उत्पन्न होते है जोकि अन्त में भी दुर्गति ही होती है।
इस्कॉन के प्रचारक ब्रम्हचारी आचार्य द्विज राज प्रभु ने जिला कारागृह में भागवतम् महोत्सव के अन्तर्गत कहा कि गीता भागवत को भागवत वाणी और ईश्वर के श्रीमुख से मानव मात्र के कल्याण हेतु युद्ध परिक्षेत्र में कही गई जीवन मूल्यों, सनातन धर्म, संस्कृति और आध्यात्म की अभिव्यक्ति है । जिसमें सभी के उद्धार ओर कर्तव्यों निर्वहन की अपेक्षा का वर्णन है ।
*युद्ध में नहीं परोपकार में शान्ति है* इस अवसर पर आचार्य अभय गौरांग दास ने अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत भक्ति साधना संघ के विश्व हरिनाम पखवाड़ा अभियान के अंतर्गत बुनियादी जीवन मूल्यों के प्रति विश्व भर में इस्कॉन के प्रति प्रेम विश्वास के बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि विश्व में चहुंओर लड़ाई झगड़े, दंगें फ़साद, युद्व का बोलबाला है लेकिन शान्ति भाईचारा बंधुत्व हेतु पूरा विश्व भारत की ओर सावचेत होकर भारतीय संस्कृति, सनातनी त्रिवेणी भारतीयता जीवन मूल्यों,सेवा संस्कार ओर परोपकार अहंकार रहित आनन्द की ओर टकटकी लगाए देख रहा हैं ।
