उदयपुर। “लेबर सेस अधिनियम राजस्थान में वर्ष 2009 से लागू है तथा भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण मंडल के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए उपकर राशि का उपयोग किया जाता है।“उपरोक्त जानकारी सहायक श्रम आयुक्त श्री महेन्द्र सिंह राठौड़ ने यूसीसीआई में दी।उदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्वारा राज्य सरकार के श्रम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 (बिल्डिंग एण्ड अदर कन्सट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस एक्ट 1996) के संबंध में एक जागरूकता सत्र का आयोजन यूसीसीआई भवन के पायरोटेक टेम्पसन्स सभागार में किया गया।यूसीसीआई अध्यक्ष श्री संदीप बापना ने श्रम विभाग के अधिकारियों एवं कार्यक्रम में उपस्थित सदस्य प्रतिभागियों का स्वागत किया।
उन्होंने यूसीसीआई की विभिन्न गतिविधियों का संक्षिप्त परिचय देते हुए इस कार्यक्रम के आयोजन के उद्देश्य एवं उद्योग जगत के लिए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।सत्र के दौरान सहायक श्रम आयुक्त श्री महेन्द्र सिंह राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि असंगठित क्षेत्र में कार्यरत सिविल कंस्ट्रक्शन श्रमिकों तथा प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर, फ्लोरिंग, कलर एवं पेंट आदि से जुड़े श्रमिकों के कल्याण के उद्देश्य से भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर व्यवस्था लागू की गई है।
राजस्थान में भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण मंडल का गठन 27 जुलाई 2009 को किया गया तथा इसी तिथि से उपकर के संग्रहण लागू होने की कट-ऑफ डेट निर्धारित की गई।
निर्माण कार्य पर उपकर की देयता समयबाधित होने का कोई प्रावधान नहीं है।श्री महेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत निर्माण लागत पर 1 प्रतिशत की दर से उपकर देय है।
यह उन नियोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्यों पर लागू होता है, जिनमें 10 या उससे अधिक निर्माण श्रमिक नियोजित होते हैं।उपकर की गणना के संबंध में श्री राठौड ने बताया गया कि निर्माण कार्य की कुल लागत में भूमि की कीमत तथा म्उचसवलममे’ ब्वउचमदेंजपवद ।बज, 1923 के अंतर्गत श्रमिक अथवा आश्रितों को भुगतान की गई क्षतिपूर्ति शामिल नहीं होती।
साथ ही, ₹10 लाख तक की लागत वाले निजी आवास निर्माण कार्य पर उपकर देय नहीं है।
प्रत्येक नियोक्ता के लिए निर्माण कार्य की सूचना प्रपत्र-1 में उपकर निर्धारण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है।कार्यक्रम में उपकर के निर्धारण, भुगतान प्रक्रिया, वैधानिक प्रावधानों, रिटर्न एवं ऑनलाइन अनुपालन, विलंबित भुगतान पर ब्याज, गैर-भुगतान की स्थिति में दण्ड तथा अपील प्रक्रिया पर भी विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रस्तुति के अनुसार विलंबित भुगतान पर 2 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज देय है तथा गैर-भुगतान की स्थिति में उपकर की राशि तक दण्ड लगाया जा सकता है।
निर्धारित आदेश के विरुद्ध अपील श्रम आयुक्त, जयपुर के समक्ष तीन माह के भीतर की जा सकती है।उपकर नियमों के अंतर्गत भुगतान की समयसीमा के बारे में श्री राठौड ने बताया कि उपकर सामान्यतः निर्माण कार्य पूर्ण होने अथवा अंतिम निर्धारण के 30 दिनों के भीतर जमा किया जाना है।
एक वर्ष से अधिक अवधि वाले प्रोजेक्ट्स के लिए वार्षिक भुगतान का प्रावधान है तथा निर्माण अनुमति के समय अग्रिम उपकर भुगतान की भी व्यवस्था है।श्रम निरीक्षक श्री गवरेश दवे ने बताया गया कि प्रत्येक नियोक्ता का दायित्व है कि निर्माण कार्य प्रारंभ होने के 30 दिनों के भीतर प्रपत्र-1 प्रस्तुत करे तथा किसी परिवर्तन / संशोधन की सूचना भी 30 दिनों के भीतर दी जाए।
श्रम विभाग के अधिकारी निर्माण स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक दस्तावेजों एवं रजिस्टरों का सत्यापन कर सकते हैं तथा आवश्यकतानुसार माप एवं फोटोग्राफ भी ले सकते हैं।श्रम निरीक्षक श्री हेमन्त शुक्ला ने उपकर की प्रयोज्यता, उपकर की गणना एवं भुगतान प्रक्रिया, नियमों एवं वैधानिक प्रावधानों, देय तिथियों एवं ऑनलाइन अनुपालन, विलंबित अथवा गैर-भुगतान के दुष्परिणाम तथा बेहतर अनुपालन के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया।वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री अंशुल मोगरा ने श्रम कानूनों के प्रभावी अनुपालन के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
पूर्वाध्यक्ष श्री मनीष गलुण्डिया ने भी विचार रखे।कार्यक्रम के प्रश्नोत्तर सत्र में सहायक श्रम आयुक्त श्री महेन्द्र सिंह राठौड़, श्रम निरीक्षक श्री हेमंत शुक्ला एवं श्री गवरेश दवे ने प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया।
इस अवसर पूर्वाध्यक्ष पर भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम में बडी संख्या में उद्योगों, बिल्डर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स, डेवलपर्स एवं अन्य व्यावसायिक हितधारकों ने भाग लिया।कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन मानद महासचिव श्री आशीष छाबड़ा द्वारा किया गया।
