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Banswara News

लोकदेवता तेजाजी की जयन्ती धूमधाम से मनाई

राजतालाब की पाल स्थित तेजाजी मंदिर में लगा पारम्परिक तेजा दशमी मेला

मुख्य बिंदु
  • भाद्रपद शुक्ल दशमी के अवसर पर सोमवार को जन-जन की अगाध आस्था के केन्द्र लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की जयन्ती बांसवाड़ा जिले में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई गई।
  • इस अवसर पर शहर के राजतालाब की पाल स्थित प्राचीन श्री तेजाजी मंदिर में पारम्परिक तेजा दशमी मेले का आयोजन हुआ।
  • सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी और दिनभर दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
  • मेले में बांसवाड़ा शहर के साथ ही आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
  • श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के दर्शन कर पुष्पहार अर्पित किए तथा दीप प्रज्वलित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
  • अनेक श्रद्धालुओं ने नारियल चढ़ाकर लोकदेवता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं मंगल की कामना की।
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लोकदेवता तेजाजी की जयन्ती धूमधाम से मनाई

बांसवाड़ा। भाद्रपद शुक्ल दशमी के अवसर पर सोमवार को जन-जन की अगाध आस्था के केन्द्र लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की जयन्ती बांसवाड़ा जिले में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई गई।

इस अवसर पर शहर के राजतालाब की पाल स्थित प्राचीन श्री तेजाजी मंदिर में पारम्परिक तेजा दशमी मेले का आयोजन हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी और दिनभर दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।

मेले में बांसवाड़ा शहर के साथ ही आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के दर्शन कर पुष्पहार अर्पित किए तथा दीप प्रज्वलित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। अनेक श्रद्धालुओं ने नारियल चढ़ाकर लोकदेवता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं मंगल की कामना की।

पशुपालकों में विशेष आस्था

तेजाजी महाराज को लोकजीवन, पशुधन एवं जनकल्याण से जुड़ी गहरी आस्था का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण तेजा दशमी के अवसर पर बड़ी संख्या में पशुपालक भी मंदिर पहुंचे। उन्होंने तेजाजी महाराज के दर्शन एवं पूजन-अर्चन कर अपने पशुधन के स्वास्थ्य, सुरक्षा और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में ग्रामीण परिवेश और लोक आस्था से जुड़ा वातावरण विशेष रूप से दिखाई दिया।

लोक आस्था का प्रमुख केन्द्र

राजतालाब की पाल पर स्थित तेजाजी मंदिर लंबे समय से क्षेत्रवासियों की श्रद्धा का प्रमुख केन्द्र रहा है। तेजा दशमी पर यहां लगने वाला पारम्परिक मेला लोक आस्था और लोक संस्कृति के जीवंत स्वरूप को सामने लाता है। मेले में धार्मिक श्रद्धा के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का वातावरण भी बना रहा और विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने एक-दूसरे से आत्मीयता के साथ मुलाकात की।

दिनभर मंदिर परिसर में ‘तेजाजी महाराज की जय’ के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन के साथ लोकदेवता से परिवार एवं समाज के कल्याण की प्रार्थना की। तेजा दशमी के इस आयोजन ने बांसवाड़ा की लोक परम्पराओं, जनश्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत की निरन्तरता को भी रेखांकित किया।