उदयपुर । साक्षर नहीं, शिक्षित नागरिकों से विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा।
शिक्षा के माध्यम से मिले नैतिक, सामाजिक मूल्यों से ही शासन, प्रशासन में श्रेष्ठता सुनिश्चित होती है और एक सक्षम राष्ट्र का निर्माण होता है।
यह विचार विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विद्या भवन ऑडिटोरियम में आयोजित एजुकेशन टू एडमिनिस्ट्रेशन विषयक संवाद में व्यक्त किए।
इस अवसर पर विधान सभा अध्यक्ष ने डूंगरपुर मूल के निवासी, केरल के पूर्व मुख्य सचिव विश्वास मेहता की पुस्तक सैंड्स टू शोर्स का विमोचन किया।देवनानी ने कहा कि प्रशासन का संवेदनशील और समन्वयकारी होना बहुत जरूरी है।
यह गुण हमें शिक्षा,शिक्षण संस्थानों से मिलते है। शिक्षा हमें ज्ञान, विवेक, दृष्टि और सामर्थ्य देती है।
इसी से लोक कल्याणकारी निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है, सामाजिक परिवर्तन होता है और राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।प्रो. देवनानी ने कहा कि डॉ. विश्वास मेहता की पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि मेहता ने जिस तरह अपने ज्ञान, मेहनत, ध्येय निष्ठा और प्रशासनिक दक्षता से केरलम में सांस्कृतिक एकीकरण और विवेकपूर्ण रूपांतरण किया है, वह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है।उन्होंने कहा कि वर्तमान के एआई दौर में प्रभावी शिक्षा के लिए शिक्षकों एवं प्रशासकों को अपनी विरासत, संस्कार एवं मूल्यों को कायम रखते हुए आधुनिक एवं गतिशील बनना होगा।
उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे केवल पीरियड पढ़ा कर संतुष्ट न हों, बल्कि साथ साथ विद्यार्थियों को सामाजिक कार्यों एवं राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करें।
यह केवल भाषण या बोलने से नहीं होगा वरन स्वयं के आचरण एवं कार्यप्रणाली में उतारने से होगा, तभी युवा पीढ़ी इसे अंगीकार करेगी।देवनानी ने कहा कि संवाद का यह मंच तभी सार्थक होगा जब शिक्षा से प्रशासन तक की यात्रा उत्तरदायित्व ,जन सेवा, लोक कल्याण और राष्ट्र निर्माण पर आधारित हो।पुस्तक के लेखक डॉ. विश्वास मेहता ने ‘सैंड्स टू शोर्स’ को अपनी जन्मभूमि से कर्मभूमि की यात्रा बताया।
उन्होंने भावुक शब्दों में अपने माता पिता, दादा दादी का उल्लेख किया जिन्होंने विषम आर्थिक, पारिवारिक कठिनाइयों में भी शिक्षा को सर्वाेपरि रखा और इसी कारण वे आईएएस के टॉपर्स में आ सके।उन्होंने कहा कि ईमानदारी, संकल्प तथा परिश्रम ही वे श्रेष्ठ प्रशासन दे सके।इस मौके पर विशिष्ट अतिथि एमडीएस विश्वविद्यालय, अजमेर के पूर्व कुलपति एवं राज्यपाल के उच्च शिक्षा सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी ने भारत को आत्मनिर्भर बनने की ताकत केवल शिक्षा को बताते हुए कहा कि वर्तमान के डिजिटल वर्ल्ड का मुकाबला करना है तो हमारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।
उन्होंने अनुभव आधारित शिक्षा और प्रायोगिक ज्ञान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि श्रेष्ठ पुस्तकालयों तथा श्रेष्ठ प्रयोगशालाओं से ही विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा।विद्या भवन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र कुमार तायलिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्या भवन की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया।
तायलिया ने कहा कि शताब्दी वर्ष की तरफ बढ़ रहे विद्याभवन में इंटरनेशनल स्कूल, स्पोर्ट्स एकेडमी जैसे आधुनिक, विश्वस्तरीय प्रकल्प शिक्षा से सामाजिक परिवर्तन के विद्या भवन के मूल उद्देश्य व बदलते विश्व की आवश्यकताओं के अनुरूप है।
कार्यक्रम में उद्योगपति अरविंद सिंघल भी विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।संवाद कार्यक्रम का समापन विद्याभवन के सीईओ, सेवा निवृत आईएएस राजेंद्र भट्ट के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।समारोह में विद्या भवन रूरल इंस्टीट्यूट के विद्यार्थी महेश कुमार को कनाडा में कॉमनवेल्थ गेम में गोल्ड मेडल जीतने पर सम्मानित किया गया।
उन्हें वाल्केम इंडस्ट्रीज के एमडी अरविंद सिंघल एवं विद्या भवन सोसायटी की ओर से 21-21 हजार रुपये का चैक भेंट किया गया। वहीं पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र से जुड़े दीपक दीक्षित को तीसरे वर्ल्ड रिकॉर्ड पर सम्मानित किया गया।
संवाद कार्यक्रम का संचालन विद्या भवन रूरल इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ. कनिका शर्मा ने किया।
