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ग़ज़ल सम्राट जगजीतसिंह को श्रद्धांजलि: शाम-ए-ग़ज़ल में रजब अली भारती ने डेढ़ घंटे तक सुनाई अमर ग़ज़लें

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर की मिट्टी में जन्मे, पले और पढ़े पद्मभूषण स्वर्गीय जगजीतसिंह की पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय कला मंदिर ने आज

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ग़ज़ल सम्राट जगजीतसिंह को श्रद्धांजलि: शाम-ए-ग़ज़ल में रजब अली भारती ने डेढ़ घंटे तक सुनाई अमर ग़ज़लें

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर की मिट्टी में जन्मे, पले और पढ़े पद्मभूषण स्वर्गीय जगजीतसिंह की पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय कला मंदिर ने आज शाम-ए-ग़ज़ल कार्यक्रम का आयोजन किया। चौधरी रामजस सहारण सभागार खचाखच भरा रहा, जहां गायक रजब अली भारती ने जगजीतसिंह की प्रसिद्ध ग़ज़लों, नज़्मों और पंजाबी गीतों की लगातार डेढ़ घंटे तक प्रस्तुति दी।

रजब अली भारती ने बिना किसी व्यवधान के एक के बाद एक ग़ज़लें सुनाईं।

इनमें शामिल थीं-तुमको देखा तो ये ख्याल आया, हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, होठों से छू लो तुम, होशवालों को खबर क्या, तेरी खुशबू में बसे खत, ये दौलत भी ले लो, कल चौदहवीं की रात थी, सरकती जाए है रुख से नकाब, हम तो हैं परदेस में, प्यार का पहला खत, झुकी झुकी सी नज़र, तुम नहीं ग़म नहीं, कौन कहता है मोहब्बत की ज़ुबान, मैं चाहता भी यही था, चिट्ठी ना कोई संदेश, आपको देखकर देखता रह गया, कोई फरियाद तेरे दिल, नित खैर मंगा, चुले अग्ग न घड़े दे विच पाणी, ताई दिन न जवानी नाल और बात निकलेगी तो फिर।

इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को जगजीतसिंह की यादों में डुबो दिया।

मुख्य अतिथि समाजसेवी रवि गोल्याण और विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुभाष चौधरी ने रजब अली भारती की गायकी की सराहना की। उन्होंने संगत करने वाले कलाकारों- तबले और ढोलक पर रिदम गुरु सुनील मौर्य, की-पैड पर कुलदीप अरोड़ा, आर्गन पर पंकज पाहवा तथा लुभानु की भी तारीफ की।

राष्ट्रीय कला मंदिर का जगजीतसिंह से पुराना नाता रहा है। किशोरावस्था में उनकी गायन प्रतिभा को सबसे पहले इसी संस्था ने पहचाना और प्रोत्साहित किया था।

इसी संबंध में संस्थान हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक जगजीतसिंह के कद्रदान तथा गीत-संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय कला मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद ने उपस्थित श्रोताओं, जगजीतसिंह के प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कला मंदिर कला, संस्कृति, गीत और संगीत को बढ़ावा देने की अपनी यात्रा जारी रखेगा।

कार्यक्रम का संचालन कवियत्री रितु सिंह और रंग कमी निल्यकांत छाबड़ा ने किया।